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कर्नाटक का पवित्र तीर्थस्‍थल धर्मस्‍थल में सामूहिक तौर पर लाशों के दफन की रहस्यमयी घटना की जांच में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। साइट संख्या 6 से मानवीय कंकाल के अवशेष प्राप्त हुए थे, जिससे जांच को नई दिशा मिली है। वहीं अब इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

जिसके बाद कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले की बेलथांगडी पुलिस गंभीर आलोचना से घिर चुकी है।पुलिस ने बीते 15 वर्षों में अज्ञात मौतों के सारे रिकॉर्ड नष्‍ट कर दिए है। ये ही वो अवधि है जब धर्मस्‍थला में महिलाओं और नाबालिगों की बड़ी संख्‍या में शव दफनाने के गंभीर आरोप लगे है और उसकी एसआईटी जांच कर रही है।

दरअसल, यह खुलासा तब हुआ जब एक RTI ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 174(ए) के तहत पिछले 15 वर्षों की अज्ञात अप्राकृतिक मौतों की जानकारी मांगी। पुलिस ने जवाब देते हुए स्‍वीकार किया कि उसने 2000 से 2015 के बीच दर्ज अज्ञात मौतों के महत्वपूर्ण रिकॉर्ड नष्ट कर दिए, जबकि यह वही अवधि है जब धर्मस्थला में महिलाओं और नाबालिगों के बड़ी संख्या में शव दफनाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

पुलिस ने बताया क्‍यों नष्‍ट किए सारे रिकॉर्ड

पुलिस ने स्‍वीकार किया है कि शवों की पहचान के लिए दीवारों पर लगे पोस्‍टर, नोटिस और पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट मौजूद नहीं है क्‍यों कि नियमों और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उन्‍हें नष्‍ट कर दिया गया है। यह RTI कडबा तालुक के कालमेठडका स्थित नीति टीम ने दाखिल की थी।

क्‍या पुलिस ऐसे रिकॉर्ड नष्‍ट कर सकती है?

कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज संगठनों पुलिस के इस जवाब से हैरान हैं क्‍योंकि जनहित से जुड़े ऐसे संवेदनशील रिकॉर्ड नष्ट करने का पुलिस को कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है। दक्षिण कन्नड़ जैसे सर्वाधिक डिजिटलीकरण वाले जिले में इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों का डिजिटलीकरण न करना भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

क्‍या छिपाना चाह रही ये मौतों का रहस्‍य?

आलोचकों का तर्क है कि नष्ट किए गए रिकॉर्ड में उन अज्ञात मृतकों की जानकारी हो सकती है, जिनके परिवार आज भी उनकी तलाश में हैं। कर्नाटक पुलिस मैनुअल के अनुसार, अज्ञात शवों की पहचान के लिए सार्वजनिक सूचना और प्रचार अनिवार्य है। ऐसे में रिकॉर्ड मिटाना प्रोटोकॉल और जवाबदेही का गंभीर उल्लंघन है।

क्‍या है 100 लाशों को दफन करने का मामला?

इस पूरे मामले की जड़ एक पूर्व सफाईकर्मी की गुमनाम शिकायत में है। व्हिसलब्लोअर ने दावा किया था कि 1995 से 2014 के बीच उसे जबरन कई शवों को दफनाने और जलाने को मजबूर किया गयाा था। उसने आरोप लगाया था कि इन शवों में महिलाएं और नाबालिग भी शामिल थे, जिनमें से कई शवों पर यौन शोषण के स्पष्ट निशान थे।

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