रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलनकारी राज्य उत्सव के जन्मदाता छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी द्वारा 31 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन स्थल छत्तीसगढ़ी भवन हांडीपारा में 21 वाँ राज जलसा का दो सत्र में आयोजन किया गया। राज्योत्सव के प्रथम सत्र में छत्तीसगढ़ की दशा और दिशा पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र के गोष्ठी के प्रतिभागी में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी दाऊ जी.पी.चंद्राकर,कार्यकारी अध्यक्ष राज्य आंदोलन कारी श्री अनिल दुबे, महासचिव राज्य आंदोलनकारी श्री दीनदयाल वर्मा, संगठन सचिव राज्य आंदोलन कारी जागेश्वर प्रसाद, कार्यकारणी के सदस्य श्री लालाराम वर्मा, अशोक ताम्रकार,गोवर्धन वर्मा, बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप,ईश्वर साहू, विमल ताम्रकर,चंदप्रकाश साहू, पंचराम सोनी,श्याम रतन जायसवाल,चयन कौशिक ने विचार व्यक्त किया।

गोष्ठी के विषय छत्तीसगढ़ की दशा दिशा का आधार विषय पर राज्य आंदोलनकारी संगठन सचिव जागेश्वर प्रसाद ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी सर्वप्रथम राज्योत्सव के जन्मदाता है उसी प्रकार से शोषण मुक्त छत्तीसगढिय़ा राज्य का भी प्रथम शंखनाद करने वाला संगठन भी है। राज्य आंदोलनकारी कार्यकारी अध्यक्ष अनिल दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी कार्यालय छत्तीसगढ़ी भवन केवल भवन नहीं है यह सम्पूर्ण छत्तीसगढिय़ों के लिए विचार स्थल का केंद्र बिंदु है कृषि विशेषज्ञ राज्य आंदोलन कारी महासचिव दीनदयाल वर्मा ने कहा कि किसानों के नाम पर भाजपा-कांग्रेस राजनीति करते हैं। किसान हित के लिए कोई लाभकारी नीति नहीं बनाते-छसपा का मानना है कि कृषि को उद्योग का दर्जा देने से किसानों को लाभ होगा। गोष्ठी के अध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी दाऊ जी.पी.चंद्राकर ने कहा कि धन-श्रम सब कुछ किसानों का लेकिन विधायक और सरकार पूंजीपतियों के दलाल बनते हैं।इस शोषणकारी व्यवस्था को बदलने के लिए संगठित होकर सतत संघर्ष करने से व्यवस्था में परिवर्तन आएगा और शोषित समाज को मुक्ति मिलेगा। राज्योत्सव में रायपुर, महासमुंद, दुर्ग, बेमेतरा, राजनांदगांव, कवर्धा, रायगढ़, जशपुर और अम्बिकापुर जिला के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।


















