ज्योतिष के अनुसार जब नवग्रहों के राजा यानि सूर्यदेव वृश्चिक राशि से निकलकर देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु में प्रवेश करते हैं तो खरमास प्रारंभ होता है. हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों जैसे मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश आदि जैसे काम रुक जाते हैं. शुभ-अशुभ की दृष्टि से खरमास में आखिर कौन से काम करने और कौन से नहीं करने चाहिए.

ज्योतिष के अनुसार जब प्रत्यक्ष देवता माने जाने वाले सूर्यदेव गुरु की राशि धनु अथवा मीन में प्रवेश करते हैं तो खरमास लगता है. आज 16 दिसंबर 2025 को सूर्य वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश कर गए हैं. आज धनु संक्राति का पुण्य काल प्रात:काल 07:07 से लेकर दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा. वहीं इसका महापुण्यकाल सुह 07:07 से लेकर 08:50 बजे तक रहेगा. साल में दो बार आने वाले खरमास के लगते ही मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है.

खरमास के दौरान क्या नहीं करना चाहिए
खरमास के दौरान व्यक्ति को तमाम तरह के वाद-विवाद से बचना चाहिए. इस दौरान होने वाले विवाद अक्सर बड़ी आर्थिक एवं मानहानि का कारण बनते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान धन के लेनदेन में सावधानी बरतनी चाहिए. खरमास के दौरान किसी को धन उधार देने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान उधार दिया गया धन बामुश्किल वापस मिलता है.

खरमास के दौरान सिर्फ सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए. इस समय लहसुन, प्याज, मांस-मछली और अंडे जैसे तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखनी चाहिए वरना वरना सूर्यदेव नाराज हो जाते हैं. 

खरमास में घर बनवाना या जमीन-मकान खरीदना और बेचना भी शुभ नहीं माना जाता है. कहते हैं कि इस दौरान किए गए ऐसे ऐसे कामों में रुकावटें और परेशानियां आ सकती हैं.हिंदू धर्म में खरमास के दौरान शुभ कार्यों को करने की मनाही है. ऐसे में खरमास के 30 दिनों में किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य, जैसे शादी, मुंडन, गृहप्रवेश, जनेउ आदि कार्य नहीं करने चाहिए.

खरमास में क्या करना चाहिए

  • हिंदू मान्यता के अनुसार खरमास के दौरान व्यक्ति को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए और उगते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य देकर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ या फिर ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का अधिक से अधिक जप करें.
  • खरमास में कुछेक चीजों का दान करना अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है. ऐसे में व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति् को चना, गुड़, चावल, काला तिल, कंबल, कपड़े और धन आदि का दान करना चाहिए.
  • खरमास के दौरान व्यक्ति को सूर्य देवता की विशेष साधना और आराधना करते हुए सात्विक जीवन जीना चाहिए. खरमास में व्यक्ति को अपनी वाणी और व्यवहार से विनम्र रहना चाहिए.
  • खरमास के दौरान यदि संभव हो तो किसी जल तीर्थ यानि गंगा या यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए. यदि जल तीर्थ पर न जा पाएं तो घर में पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करके पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं.

( यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. )

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