What's Hot

अहमदाबाद : गुजरात हाई कोर्ट ने एक दंपत्ति के तलाक का रास्ता साफ कर दिया है, जिनका वैवाहिक जीवन निवास स्थान को लेकर मतभेदों के कारण टूट गया था। पति ब्रिटेन में रहना चाहता था, जबकि पत्नी भारत छोड़ना नहीं चाहती थी। दोनों के बीच सिर्फ इसी बात को लेकर विवाद था। हाई कोर्ट ने अहमदाबाद की पारिवारिक अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आपसी सहमति से दायर तलाक की याचिका को समय से पहले खारिज कर दिया गया था।

पारिवारिक अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13बी (2) के तहत अनिवार्य छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि से बचने के लिए छूट आवेदन के अभाव का भी हवाला दिया था। हाई कोर्ट ने तलाक की याचिका को बहाल कर दिया और पारिवारिक अदालत को छह महीने के भीतर मामले का फैसला करने का निर्देश दिया।


पत्नी ने भारत को चुना

दंपति का विवाह 9 दिसंबर, 2023 को हुआ था, लेकिन शादी के लगभग एक महीने बाद, 17 जनवरी, 2024 को वे अलग हो गए। पति पति आगे की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन चला गया। वहां जाकर उसने पत्नी को बताया कि वह ब्रिटेन में स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहा है और उसे भी उसके साथ आने के लिए कहा। हालांकि, महिला भारत छोड़ने को तैयार नहीं थी। उसने उन्हें बताया कि वह अहमदाबाद में बस चुकी है और भारत में ही अपना करियर बनाना चाहती है।

हालांकि दोनों के परिवारों ने उनके फैसले पर विचार करने को कहा। रिश्ते को थोड़ा समय देने को कहा। वे भी आपस में बात करते रहे लेकिन बात नहीं बना। दोनों अपने फैसले पर अडिग रहे और फिर अलग होने का फैसला लिया।

अप्रैल 2025 में दायर की याचिका

कपल ने 1 अप्रैल, 2025 को अधिनियम की धारा 13बी के तहत तलाक की याचिका दायर की। उन्होंने कोर्ट में कहा कि उनके बीच मतभेद अलग-अलग देशों में रहने की इच्छा के कारण उत्पन्न हुआ है। दोनों ने कहा कि सुलह संभव नहीं है और आपसी सहमति से विवाह विच्छेद का अनुरोध किया ताकि वे अपने-अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

अक्टूबर में में दूसरी याचिका हुई खारिज

दंपति ने 24 जुलाई, 2025 को दूसरी याचिका दायर की, जो याचिका दायर करने की तारीख से छह महीने पहले थी, जिसकी समय सीमा 1 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो रही थी। अगस्त में, पारिवारिक न्यायालय ने याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि निर्धारित छह महीने की शांति अवधि केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि सुलह का एक सार्थक अवसर था। याचिका खारिज करते समय न्यायालय ने माफी आवेदन के अभाव का भी हवाला दिया।

गुजरात हाई कोर्ट पहुंचा मामला

इसके बाद दंपति ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश के विरुद्ध हाई कोर्ट में याचिका दायर की और तलाक की अर्जी को बहाल करने तथा पारिवारिक न्यायालय को इस पर नए सिरे से फैसला करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

गुजरात हाई कोर्ट ने मंजूर किया तलाक

सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति संगीता विशेन और न्यायमूर्ति निशा ठकोर की पीठ ने कहा कि स्पष्ट रूप से, पक्षों के बीच पुनर्मिलन की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि याचिका प्रस्तुत करने की तिथि तक दोनों पक्ष एक वर्ष से अधिक समय से अलग रह रहे हैं। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तलाक स्वीकार कर लिया है, इसलिए, धारा 13बी (1) में निर्धारित छह महीने और एक वर्ष की अवधि लगभग पूरी हो चुकी है। संबंधित पक्षों के रुख को देखते हुए, पुनर्मिलन संभव नहीं है। इस न्यायालय की राय में, पक्षों के अनुरोध को अस्वीकार करने से केवल उनकी पीड़ा ही बढ़ेगी। दोनों पक्ष युवा हैं और अपनी इच्छा के अनुसार अपना करियर बनाना चाहते हैं।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031