चेन्नै/पुडुचेरी: एक्टर विजय की रैली में टीवीके के नेता से भिड़ने वाली तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह का दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है। दरअसल, रैली के दौरान आईपीएस ऑफिसर ईशा सिंह को टीवीके नेता बुस्सी आनंद से अनाउंसमेंट के बीच में माइक छीनते हुए देखा गया। ईशा सिंह ने और भीड़ जुटाने की अपील करते हुए जब देखा था तो उन्होंने टीवीके के जनरल सेक्रेटरी बुस्सी आनंद का भाषण बीच में रोक दिया था। टीवीके नेता से माइक छीनने की घटना 9 दिसंबर को हुई थी। टीवीके ने यह रैली पुडुचेरी को उप्पलम पोर्ट ग्राउंड पर रखी थी। इस जगह पर लोगों की एकत्र होने की क्षमता 5 हजार थी। तब ईशा सिंह के एक्शन की काफी तारीफ की गई थी। उन्हें सोशल मीडिया पर लेडी सिंघम, रियल लेडी सिंघम जैसे नाम मिले थे। पुडुचेरी से ट्रांसफर किए जाने के बाद आईपीएस ईशा सिंह एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं।
कौन हैं ईशा सिंह?
1998 में मुंबई में जन्मी ईशा सिंह एक बेहद सम्मानित परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनकी मां आभ सिंह हैं। जो पेशे वे एडवोकेट हैं। ईशा के पिता योगेश प्रताप सिंह (वाई पी सिंह) 1985 बैच के IPS ऑफिसर थे। उन्होंने भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए बार-बार ‘सजा’ वाली पोस्टिंग मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया था, जबकि उनकी मां आभा सिंह ने कानून की प्रैक्टिस करने के लिए भारतीय डाक सेवा छोड़ दी थी। आभा सिंह ने सलमान खान हिट-एंड-रन सहित हाई-प्रोफाइल जनहित के मामलों को संभाला है। इतना ही नहीं ईशा सिंह के नाना भी एक पुलिस ऑफिसर थे।
कड़क तेवर वाली हैं ईशा
2021 बैच की आईपीएस अधिकारी ईशा सिंह एजीयूएमटी कैडर में आती हैं। 30 साल की ईशा बतौर पुलिस लोकहित के कई मामले में कड़े फैसले लेकर सभी का ध्यान खींच चुकी हैं। पुलिस में शामिल होने से पहले ईशा ने कानून की पढ़ाई की। उन्होंने नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु से ग्रेजुएट के बाद कॉर्पोरेट वर्ल्ड की इंटर्नशिप औश्र नौकरी को ठुकरा दिया। इसके बजाय मानवाधिकार और जनहित याचिका मामलों को संभालने का विकल्प चुना। 2021 में, उन्होंने मुंबई में सेप्टिक टैंक साफ करते समय मारे गए तीन मैनुअल स्कैवेंजर्स की विधवाओं के लिए 10 लाख रुपये दिलवाए। इसके बाद यूपीएसपी में चयनित होकर आईपीएस बनीं।














