रायपुर। इन दिनों बाजारों में मशीनों से बने खिलौनों, शिल्प, चित्रकारी से बनी वस्तुओं की भरमार देखने को मिलती है, लेकिन कभी इन वस्तुओं के निर्माण में हाथों की जादूगरी दिखाने वाले लोगों को हम भूल नहीं सकते। कुछ वर्षो पहले तक इनकी जिन्दगी आसान थी, हर क्षेत्र में बढ़ती तकनीकी दखलंदाजी ने इन्हें बड़ी आर्थिक मार दी है। वर्षों से समाज के लोगों के बीच सेवा देने वाले इन परिवारों को फिर से आर्थिक तरक्की के रास्ते पर लाने के लिए नई सरकार ने पौनी पसारी योजना शुरू की है। आधुनिकता के साथ छत्तीसगढ़ में प्रचलित पौनी पसारी व्यवस्था लुप्त होते जा रही थी। पहले यह हमारी संस्कृति में समाया हुआ था। प्राचीन समय से ही यह परम्परागत कार्यों से जुड़े लोगों के रोजगार का साधन रही है। शहरी और ग्रामीण जीवन में इसकी विशेष महत्ता है। भले ही हम आधुनिकता के दौड में इन्हें भुला दिए हैं लेकिन इनकी उपयोगिता आज भी है। राज्य के शहरी और ग्रामीण जनजीवन में मिट्टी के बर्तन, कपड़े धुलाई, जूते-चप्पल तैयार करना, लकड़ी से संबंधित कार्य, पशुओं के लिए चारा, सब्जी-भाजी उत्पादन, कपड़ों की बुनाई, सिलाई, कंबल, मूर्तियां बनाना, फूलों का व्यवसाय, पूजन सामग्री, बांस का टोकना, सूपा, केशकर्तन, दोना-पत्तल, चटाई तैयार करना तथा आभूषण एवं सौंदर्य सामग्री इत्यादि का व्यवसाय पौनी-पसारी व्यवसाय के रूप में मान्यता है। शहरों में परम्परागत व्यवसाय करने वाले नाई धोबी, कुम्हार बढ़ई लोहार समुदायों को तरक्की की राह पर बराबरी से खड़ा करने के लिए पौनी पसारी योजना में नगरीय निकायों में उनके व्यवसाय के लिए शेड बनाकर दिया जा रहा है। यह योजना प्रदेश के 14 नगर निगम सहित 168 नगरीय निकायों में क्रियान्वित की जा रही है। इन वर्गों के लोगों को वर्कशेड एवं चबूतरा निर्माण के लिए 73 करोड रूपए की मंजूरी दी गई है। परम्परागत रूप से शहरों में व्यवसाय करने वाले लोगों की खराब माली हालत को देखते हुए राज्य सरकार की इस पहल का इन कार्यों से जुड़े लोगों ने खुले दिल से स्वागत किया है। राज्य सरकार की इस पहल से गरीब और निम्न तबकों से ताल्लुक रखने वाले लोगों में सरकार के प्रति भरोसा जागा हैं। इन लोगों का कहना है इस प्रकार की व्यवस्था से गरीबों को राहत मिली है। यह योजना गरीबी और बेरोजगारी दूर करने वाली है। राज्य में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। परम्परागत रूप से समाज की सेवा करने वाले इन वर्गों के लोगों के कौशल विकास के लिए भी इंतजाम किए गए है़। इनकी कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ ही इन्हें उनके कार्यों के मुताबिक अत्याधुनिक मशीने भी दी जा रही है। कुम्हारों को विजली से चलने वाले चाक हों या मिट्टी के सजावटी वस्तुओं में ग्लेजिंग पालिश इन कार्यों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। राज्य में छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों को आजीविका मिशन के जरिए आर्थिक मदद और प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
पौनी पसारी : फिर दिखेगी छत्तीसगढ़ के कारीगरों के हाथों की जादूगरी
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