समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और दुद्धी विधानसभा क्षेत्र से विधायक विजय सिंह गोंड का लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं। उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष अवध नारायण यादव ने की। जैसे ही उनके निधन की खबर सामने आई, पूरे सोनभद्र जनपद सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, विजय सिंह गोंड की तबीयत काफी समय से खराब चल रही थी। किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी के चलते उन्हें लखनऊ के एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। तमाम प्रयासों के बावजूद चिकित्सक उन्हें बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पार्टी नेताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों में गहरा दुख व्याप्त हो गया।
विजय सिंह गोंड को सोनभद्र की दुद्धी विधानसभा और पूरे दक्षिणी उत्तर प्रदेश में आदिवासी राजनीति का ‘पितामह’ माना जाता था। प्रदेश की 403वीं और अंतिम विधानसभा सीट दुद्धी से उन्होंने आदिवासी समाज की आवाज को दशकों तक मजबूती से उठाया। उनके निधन को आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति के लिए भी एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
विजय सिंह गोंड आदिवासी समाज के अधिकारों और पहचान की लड़ाई के अग्रणी नेताओं में शुमार थे। उन्होंने दुद्धी और ओबरा विधानसभा क्षेत्रों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सीट घोषित कराने के लिए लंबा संघर्ष किया और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया। उनका यह प्रयास आदिवासी समाज के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
विजय सिंह गोंड का राजनीतिक सफर बेहद साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। वे वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत थे। वर्ष 1979 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर राजनीति में कदम रखा। यह जीत केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि आदिवासी समाज के लिए भी एक नई शुरुआत थी।
पहली जीत के बाद विजय सिंह गोंड ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1989 में उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर आदिवासी राजनीति में एक नया अध्याय लिखा। इसके बाद वे विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े, लेकिन उनका मूल उद्देश्य हमेशा आदिवासी समाज के हितों की रक्षा और उनके अधिकारों को स्थापित करना ही रहा।
विजय सिंह गोंड कुल आठ बार विधानसभा सदस्य रहे। यह उपलब्धि उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली विधायकों की श्रेणी में खड़ा करती है। उन्होंने विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह आदिवासी समाज के मुद्दों को मजबूती से उठाया। जंगल, जमीन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषय उनके प्रमुख एजेंडे रहे।














