What's Hot


नलखेड़ा/आगर/ मालवा। नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर के पुजारियों से एसडीएम सर्वेश यादव द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के विरोध अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने एसडीएम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही एसडीएम को हडाने का मांग की गई। इस बीच समाज की जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने प्रशासनिक कार्यसुविधा एवं व्यवस्था संचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत कलेक्टर आगर मालवा के निर्देश पर जारी आदेश के अनुसार नलखेड़ा एसडीएम सर्वेश यादव से माँ बगलामुखी मंदिर समिति का समस्त प्रभार आगामी आदेश तक हटा दिया गया है। जारी आदेश में यह प्रभार अब डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंप दिया गया है। आदेश अपर कलेक्टर राजेंद्र वर्मा द्वारा 08 जनवरी 2026 को जारी किया गया।
गौरतलब है कि बीते दिनों मंदिर परिसर में घटित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए आस्था-स्थल की संवेदनशीलता, श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने तत्काल व्यवस्थागत निर्णय लेते हुए यह प्रशासकीय परिवर्तन किया। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह निर्णय किसी भी प्रकार की बाधा या तनाव की स्थिति से बचने तथा मंदिर प्रबंधन को सुचारु बनाए रखने के लिए लिया गया है। मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर शासन स्तर पर आवश्यक परीक्षण एवं विचार प्रक्रिया जारी मानी जा रही है।


इस घटनाक्रम के प्रारंभिक चरण में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष पुष्पेन्द्र मिश्र ने भी बयान जारी कर समाज की भावनाओं से शासन-प्रशासन को अवगत कराया था। उन्होंने कहा था कि समाज किसी टकराव के पक्ष में नहीं है, लेकिन सम्मान और मर्यादा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद समाजजनों और मंदिर से जुड़े पुजारियों में रोष और बढ़ा, जिसके बाद स्थिति ने व्यापक रूप ले लिया। सार्थक चिंतन जब आस्था की शांति सर्वोपरि हो, तब प्रशासन को भाषा से पहले विवेक चुनना होता है।
माँ बगलामुखी पीठ से जुड़ा यह प्रकरण केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि यह उस संतुलन की याद दिलाता है जहाँ शक्ति, संवेदनशीलता और शब्दों की मर्यादा एक साथ चलनी चाहिए। प्रशासनिक कार्य सुविधा के आधार पर लिया गया यह निर्णय यह संकेत देता है कि आस्था स्थलों पर व्यवस्था और शांति सर्वोपरि है। ऐसे स्थलों पर पद, अधिकार या अधिकार-क्षेत्र से अधिक महत्वपूर्ण होता है—संयम, संवाद और सम्मान। लोकतांत्रिक व्यवस्था में समाज की चेतावनी को टालना संकट को न्योता देना होता है—समय पर सुनी गई बात ही टकराव को निर्णय में बदलती है।
हालिया घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया कि जब समाज की भावनाएँ आहत होती हैं, तो प्रतिक्रिया केवल विरोध नहीं होती, बल्कि वह व्यवस्था के लिए चेतावनी बन जाती है। पूजा-पाठ और हवन का रुकना प्रशासन के लिए यह संकेत था कि आस्था को अनदेखा करना व्यवस्था को अस्थिर कर सकता है। हालांकि यह निर्णय तात्कालिक समाधान है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से आवश्यक है कि प्रशासनिक भाषा, आचरण और उत्तरदायित्व—तीनों पर स्पष्ट मानक तय हों। लोकतंत्र में प्रशासन का बल आदेश में नहीं, बल्कि विश्वास और संतुलन में होता है। माँ बगलामुखी पीठ जैसी शक्तिपीठें यही संदेश देती हैं कि—जहाँ श्रद्धा केंद्र में हो, वहाँ अहंकार नहीं, विवेक शासन करता है।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930