लड़कों का कान छिदवाना आज भले ही फैशन बन गया हो, लेकिन सनातन धर्म में इसे पवित्र कर्णवेध संस्कार कहा गया है. ज्योतिष और आयुर्वेद मानते हैं कि गलत मुहूर्त, अशुद्ध धातु या केवल स्टाइल के लिए किया गया कान छिदवाना अशुभ प्रभाव दे सकता है. जानिए कब लड़कों का कान छिदवाना शुभ होता है और किन गलतियों से बचना जरूरी है.

आज के समय में लड़कों का कान छिदवाना एक फैशन ट्रेंड माना जाता है. सेलिब्रिटीज़, सोशल मीडिया और युवाओं के बीच यह आम होता जा रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सनातन धर्म और ज्योतिष शास्त्र में लड़कों का कान छिदवाना केवल स्टाइल नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है? वहीं कुछ स्थितियों में यही कान छिदवाना अशुभ प्रभाव भी दे सकता है.

सनातन धर्म में क्या है मान्यता?

हिंदू धर्म में इसे कर्णवेध संस्कार कहा गया है, जो 16 संस्कारों में शामिल है. शास्त्रों के अनुसार सही उम्र, शुभ मुहूर्त और विधि से किया गया कान छिदवाना बच्चे के मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता है. यही कारण है कि प्राचीन काल में लड़कों का भी कर्णवेध कराया जाता था.

ज्योतिष के अनुसार कब होता है अशुभ?

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर लड़कों का कान छिदवाना, गलत तिथि या अशुभ नक्षत्र में, बिना शुद्धि-संस्कार, नकली या सस्ती धातु से केवल दिखावे या फैशन के लिए किया जाए, तो यह शनि, राहु-केतु और सूर्य ग्रह से जुड़ी परेशानियां बढ़ा सकता है. मान्यता है कि इससे विवाह में देरी, आत्मविश्वास की कमी, मानसिक तनाव, करियर में रुकावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.

विज्ञान और आयुर्वेद क्या कहते हैं?

आयुर्वेद के अनुसार कान के निचले हिस्से में एक महत्वपूर्ण प्रेशर पॉइंट होता है. इस बिंदु पर छेदन करने से दिमाग के दोनों हिस्से सक्रिय होते हैं, याददाश्त और एकाग्रता बढ़ती है, तनाव और अवसाद में राहत मिलती है.

कौन-सी धातु मानी जाती है शुभ?

शास्त्रों में सोना और चांदी सबसे शुभ मानी गई है. ज्योतिष के अनुसार सोने की बाली पहनने से सूर्य और गुरु ग्रह मजबूत होते हैं, जिससे मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता बढ़ती है. लड़कों का कान छिदवाना अगर केवल फैशन के लिए किया जाए, तो यह अशुभ भी हो सकता है. लेकिन शुभ मुहूर्त, सही विधि और शुद्ध धातु के साथ किया गया कर्णवेध संस्कार जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक संतुलन और सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है.

(Disclaimer: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र पर आधारित है. इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है, न कि किसी प्रकार का दावा या सलाह.)

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