कांग्रेस की इस रीति नीति को देख कर भारतीयों में इसकी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक ही था। पानी सिर के ऊपर से गुजरने की नौबत आ रही थी। इसलिए भारत में कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह हो गया और देश ने सत्ता भाजपा को दी…

तीन दिन पहले सोनिया गांधी के सुपुत्र श्री राहुल गांधी कुरुक्षेत्र आए थे। उन्होंने वहां हरियाणा के कांग्रेस नेताओं को संबोधित किया और कहा जाता है कि उन्हें भारत का इतिहास भी पढ़ाया। वैसे तो कुरुक्षेत्र में ही भारत का इतिहास रचा गया है। महाभारत का युद्ध इसी कुरुक्षेत्र में हुआ था। राजा सुदास के वैदिक कालीन युद्ध के बाद यही सबसे बड़ा युद्ध था। इसलिए भारत के इतिहास को समझने और समझाने के लिए कुरुक्षेत्र से उपयुक्त स्थान कोई और नहीं हो सकता था। लेकिन इतिहास का अध्यापक बनने के लिए जरूरी है, पहले स्वयं इतिहास को पढ़ा और समझा जाए। राहुल गांधी और शायद सोनिया गांधी के परिवार की यही सबसे बड़ी समस्या है। वे अध्यापक बनने की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना अध्यापक बनने की घोषणा कर देते हैं। उन्होंने भारत की एक पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस पर येन केन प्रकारेण कब्जा कर लिया है (पार्टी के अध्यक्ष सीता राम केसरी को किस प्रकार सोनिया गांधी ने अपने कुछ विश्वस्त साथियों के साथ मिल कर पार्टी बैठक में से घसीट कर बाहर कर दिया था, यह वारदात पुरानी नहीं हुई है), इसलिए उन्हें इस पार्टी के लोग अपने छात्र रूप में आसानी से मिल जाते हैं। कुरुक्षेत्र में भी ऐसे छात्र उपलब्ध थे।

यह भी संभव है कि ये छात्र क्लास में तो चुपचाप राहुल गांधी का इतिहास पर प्रवचन सुनते रहे हैं और घर जाकर हंसते हों। खैर राहुल गांधी ने कहा कि भारत में से मुगल चले गए, ब्रिटिश भी चले गए और इसी प्रकार भाजपा वाले भी चले जाएंगे। राहुल गांधी जो भी अपने छात्रों को समझाना चाह रहे हों, लेकिन उन्होंने उदाहरण ठीक नहीं दिया। मध्य एशिया के तुर्क-मुगलों के कब्जे के बाद भारत पर यूरोप के अंग्रेजों ने कब्जा किया था। लेकिन उन्होंने कब्जा भारत पर हमला करके नहीं किया, बल्कि वे यहां व्यापारी के वेष में आए थे और धीरे-धीरे उन्होंने अलग-अलग तरीकों से कब्जा किया। लेकिन यूरोप से केवल ब्रिटिश लोग ही नहीं थे, जिन्होंने हिंदुस्तान के बड़े भूभाग पर कब्जा किया था।

यूरोप के ही पुर्तगालियों (गोवा) और फ्रांसीसियों (पुडुच्चेरी) ने भी भारत के कुछ हिस्सों पर कब्जा किया हुआ था। यदि इन सभी के भारत से चले जाने की टाइमलाइन लिखनी हो तो यह क्रम मुगल, ब्रिटिश, फ्रांसीसी और पुर्तगाली बनता है। उसके बाद हिंदुस्तान पर यूरोप के किस देश ने घुसने की कोशिश की और उसकी पद्धति क्या थी, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। ब्रिटिश लोगों ने व्यापार के माध्यम से भारत में दखलअंदाजी और इटली की सोनिया गांधी की भारत में दखलअंदाजी विवाह के माध्यम से हुई। यूरोप के इतिहास का गहराई से अध्ययन करने वाले अच्छी तरह जानते हैं कि यूरोप की राजनीति सदियों तक विवाह संबंधों से ही संचालित होती रही है। राजीव गांधी की हत्या के बाद ही सोनिया गांधी का कांग्रेस पर कब्जा हुआ और उसके माध्यम से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देश की सत्ता पर। राजीव गांधी की हत्या को लेकर सुब्रह्मणयन स्वामी अभी तक न्यायालयों में हत्या के षड्यंत्रों को लेकर प्रश्न उठाते रहे हैं। इसलिए यदि राहुल गांधी को हिंदुस्तान से यूरोपीय लोगों के चले जाने का क्रम निश्चित करना हो तो वह मुगल, ब्रिटिश, फ्रांसीसी और पुर्तगाली चले गए, उसी प्रकार अब इटली वाले भी चले जाएंगे। वैसे भी राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर एक मुकद्दमा कचहरी में लंबित है। लेकिन कांग्रेस के छात्रों को भारत का इतिहास पढ़ाते समय राहुल गांधी एक दूसरी भूल कर गए लगते हैं। वे समझा रहे हैं कि मुगल यहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस का इतिहास यह नहीं बताता। कांग्रेस का इतिहास बताता है कि मुगलों का कब्जा तो इस देश से जरूर खत्म हो गया, लेकिन कांग्रेस सरकार ने मुगलों को इस देश में ही रख लिया। मुगल मध्य एशिया के तुर्क ही थे। लेकिन मंगोलों से विवाह शादियों के चलते जो संकर नस्ल पैदा हुई थी वह भारत में मुगल कहलाई। मुगलों से पूर्व भी मध्य एशिया के तुर्कों का ही कब्जा था। कुछ भागों पर अरबों का भी कब्जा रहा। क्योंकि अरब, तुर्क, मुगल, ये सभी मजहब से मुसलमान थे, इसलिए आम तौर पर मुसलमानों का राज कह दिया जाता है। लेकिन जब तक हिंदुस्तान से इन अरबों, तुर्कों और मुगलों का कब्जा खत्म हुआ, तब तक इस देश के लोग भी बड़ी संख्या में इस्लाम पंथ या शिया पंथ में चले गए थे।

ये भारत के देसी मुसलमान थे। लेकिन इनका अरबों, तुर्कों व मुगलों से कुछ लेना-देना नहीं था। लेकिन अंग्रेजों के चले जाने के बाद जब देश की सत्ता कांग्रेस के हाथों में आई तो उसने अरबों, तुर्कों और मुगलों को बाहर निकालने की बजाय उन्होंने देश के भीतर नायक बना कर सम्मानित किया। कांग्रेस के उन छात्रों को जो कुरुक्षेत्र में राहुल गांधी का इतिहास का पीरियड ध्यान से सुन रहे थे, शायद ध्यान में होगा ही कि पंडित जवाहर लाल नेहरु ने देश का पहला शिक्षा मंत्री अरब मूल के मौलाना अबुल कलाम आजाद को ही बनाया था। दूसरे शिक्षा मंत्री सैयद नुरुल हसन भी अरब मूल के ही थे। इतना ही नहीं कांग्रेस की सरकार ने मुगल बादशाहों को सम्मानित करने के लिए दिल्ली में सडक़ों के नाम औरंगजेब मार्ग, जहांगीर मार्ग, शाहजहां मार्ग इत्यादि रखे। इतना ही नहीं कांग्रेस के इतिहासकार इन अत्याचारी मुगल बादशाहों का सामना करने वाले अपर बलिदानियों का इतिहास या तो हाशिए पर डाल दिया या फिर उसे विकृत किया गया। राहुल गांधी शायद जानते नहीं होंगे कि कांग्रेस काल में गुरु तेग बहादुर जी के बारे में पढ़ाया जाता था कि वे दिल्ली के इर्द-गिर्द अपने साथियों के साथ मिल कर लूटपाट करते थे, इसलिए औरंगजेब ने उन्हें दंडित किया था। मुगल बादशाहों ने भारत के ऐतिहासिक स्थानों को तोड़ कर जो नए प्रतीक खड़े किए, कांग्रेस सरकार उनको राष्ट्रीय गौरव के स्थान बता कर प्रचारित और संरक्षित करती रही। संक्षेप में कहना हो तो मुगल सत्ता समाप्त हो जाने के बाद भी कांग्रेस सरकार ने न केवल मुगलों को बल्कि उनकी तुर्की विरासत को भी राष्ट्रीय गौरव कह कर संरक्षित किया। अब भाजपा की बात। राहुल गांधी का कहना है कि जिस प्रकार अंग्रेज चले गए, उसी प्रकार भाजपा चली जाएगी। दरअसल जिस प्रकार कांग्रेस ने मुगल विरासत को संभाला उसी प्रकार कांग्रेस ने ब्रिटिश लोगों के जाने के बाद ब्रिटिश विरासत को भी सीने से लगा कर रखा। जिन्होंने कांग्रेस की इस ब्रिटिश मनोवृत्ति का विरोध किया, उनको नेहरु ने तुरंत सिस्टम से बाहर कर दिया। डा. भीमराव रामजी अंबेडकर कांग्रेस की इसी मनोवृत्ति का शिकार हुए थे।

कांग्रेस के भीतर भी जो लोग कांग्रेस को ब्रिटिश विरासत से मुक्त करना चाहते थे, नेहरु ने उन्हीं पुरुषोत्तम दास टंडन को पार्टी से बाहर कर दिया था। इसीलिए यह कहा जाता है कि ब्रिटिश सत्ता से मुक्त हो जाने के बाद भी भारत को ब्रिटिश चिंतन व संस्कृति के रास्ते पर ही चलाए रखने का काम कांग्रेस करती रही। यही कारण था कि ब्रिटेन सरकार कांग्रेस को अपने ज्यादा अनुकूल मानती थी। सोनिया गांधी द्वारा कांग्रेस पर कब्जा कर लेने के बाद तो चर्च की भी रुचि भारत में जरूरत से ज्यादा हो गई। कांग्रेस की इस रीति नीति को देख कर भारतीयों में इसकी प्रतिक्रिया होना स्वाभाविक ही था। पानी सिर के ऊपर से गुजरने की नौबत आ रही थी। इसलिए भारत में कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह हो गया और देश ने सत्ता भाजपा को दी। राहुल गांधी भारत और भारतीयता को समझ नहीं पा रहे हैं। यह उनका दोष नहीं है। यह उनके संस्कार हैं। धीरे धीरे उनकी इतिहास की क्लास में दाखिला लेने वाले छात्र भी कम हो रहे हैं। भाजपा जाएगी या नहीं जाएगी, इसका निर्णय तो देश के लोग ही करेंगे, लेकिन इतना निश्चित है कि अब देश की सत्ता भारतीयों के हाथों में ही रहेगी। वह मुगल और ब्रिटिश विरासत को जारी रखने वाले लोगों के हाथ में नहीं आएगी।-कुलदीप चंद अग्निहोत्री

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