जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने 5 पीएचडी विद्यार्थियों को दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित कर दिया है. इनमें जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) के 4 पदाधिकारी भी शामिल हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन छात्रों को 21 नवंबर 2025 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय के प्रवेश द्वार पर लगे ‘चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी’ यानी एफआरटी उपकरण में तोड़फोड़ का दोषी पाया गया.

निलंबन पत्र के मुताबिक किझाकूट गोपिका बाबू, अदिति मिश्रा, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार पर यह कार्रवाई की गई है. आदेश में साफ कहा गया है कि ये सभी छात्र तत्काल प्रभाव से पूरे कैंपस में ‘प्रतिबंधित’ रहेंगे. यानी निष्कासन की अवधि में उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.

जुर्माना भी लगाया गया

सिर्फ निष्कासन ही नहीं, इन छात्रों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है. निलंबन पत्र के अनुसार, हर छात्र पर 20,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में यह सख्त कदम जरूरी था, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

मामले पर संपर्क करने पर जेएनयू प्रशासन ने यह पुष्टि जरूर की कि छात्रों को निलंबन पत्र जारी कर दिए गए हैं. हालांकि, प्रशासन की ओर से इस फैसले के पीछे की विस्तृत वजहों या आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की गई. अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

इस कार्रवाई के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस और छात्र राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जेएनयूएसयू से जुड़े छात्रों और समर्थकों के बीच फैसले को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है.

दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि नियम तोड़ने पर कार्रवाई सभी के लिए समान है. अब देखना होगा कि इस फैसले के खिलाफ छात्र कोई अपील करते हैं या मामला आगे किस दिशा में जाता है.

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