डेस्क : गिलोय (Tinospora Cordifolia) को आयुर्वेद में अमृत कहा गया है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली औषधीय जड़ी-बूटी है, जो इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ कई गंभीर और पुरानी बीमारियों के इलाज में सहायक मानी जाती है। डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर से लेकर मधुमेह, पाचन समस्याओं और जोड़ों के दर्द तक गिलोय को रामबाण औषधि माना जाता है। हालांकि, इसका सेवन हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही करना चाहिए।

इम्युनिटी बढ़ाने में गिलोय का असर

गिलोय एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक इम्युनिटी बूस्टर है। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) को सक्रिय और मजबूत करता है, जिससे शरीर संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-वायरल गुण शरीर को डिटॉक्स करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। सर्दी-खांसी, वायरल फीवर, डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में गिलोय का सेवन बेहद फायदेमंद माना जाता है।

बुखार में गिलोय क्यों है अमृत समान?

गिलोय को ज्वरनाशक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त है। यह डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और मौसमी बुखार में न सिर्फ शरीर की कमजोरी दूर करता है, बल्कि प्लेटलेट्स बढ़ाने और इम्युनिटी मजबूत करने में भी मदद करता है। गिलोय का काढ़ा या जूस दिन में 1–2 बार लेने से तेजी से लाभ मिलता ह

डायबिटीज में कैसे मदद करता है गिलोय?

गिलोय इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाकर और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह मधुमेह के मरीजों के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ एक उपयोगी प्राकृतिक सप्लीमेंट के रूप में काम कर सकता है।

पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

गिलोय पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज, गैस, एसिडिटी और पेट फूलना जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। यह आंतों की कार्यक्षमता बढ़ाकर शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाता है।

जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों में लाभ

गिलोय में मौजूद सूजनरोधी और बलवर्धक गुण गठिया, जोड़ों के दर्द और अकड़न को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा, यह त्वचा से जुड़ी समस्याओं जैसे मुंहासे, खुजली और एलर्जी में भी लाभकारी है। गिलोय शरीर को अंदर से डिटॉक्स कर त्वचा को साफ और स्वस्थ बनाता है।

गिलोय का सेवन कैसे करें?

गिलोय का जूस या काढ़ा
सुबह खाली पेट लेना सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है
पाउडर रूप में भी लिया जा सकता है।

गिलोय का अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है। गर्भवती महिलाएं, ऑटोइम्यून बीमारी से ग्रस्त लोग और डायबिटीज मरीज इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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