भारतीय शेयर बाजार में सोमवार सुबह भारी बिकवाली देखने को मिली है। ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा टूटकर 73,000 के नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 250 अंक से ज्यादा गिरकर 22,900 के नीचे आ गया। इस गिरावट का असर बाजार की कुल वैल्यू पर भी पड़ा। BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 6 लाख करोड़ रुपये घटकर लगभग 476 लाख करोड़ रुपये रह गया। सेंसेक्स की सभी 30 कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
बाजार में चौतरफा बिकवाली
बाजार की गिरावट सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 दोनों में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। बाजार में डर का स्तर बताने वाला India VIX भी करीब 13 फीसदी उछलकर 14 के आसपास पहुंच गया।
शेयर बाजार में क्यों आई आज गिरावट
- ईरान-अमेरिका तनाव ने बढ़ाई चिंता
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, बाजार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द एक बार फिर मिडिल ईस्ट तनाव बना हुआ है। ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने और सात दिन के सीजफायर का प्रस्ताव दिए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह खबर ऐसे समय आई है, जब कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर से ऊपर बने हुए हैं। ईरान की ओर से भी पीछे हटने के संकेत नहीं मिले हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में निवेशक अब मि़डिल ईस्ट से आने वाली हर खबर पर नजर रख रहे हैं।
2. कच्चे तेल की कीमत फिर 107 डॉलर के करीब
तनाव बढ़ने का सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा। सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 2 फीसदी चढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता बढ़ाती है। तेल बाजार की अनिश्चितता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जेपी मॉर्गन ने कहा है कि मौजूदा हालात में तेल की दिशा को लेकर स्पष्ट अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। बैंक के विश्लेषकों ने संघर्ष के बारे में आगे की दिशा को लेकर अनिश्चितता जताई है।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। ऊंची बॉन्ड यील्ड की स्थिति में निवेशकों के लिए डेट मार्केट ज्यादा आकर्षक हो सकता है। इसका असर जोखिम वाले एसेट्स यानी शेयरों पर पड़ सकता है। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 5.2 फीसदी से ऊपर पहुंच गई है। 30 साल की बॉन्ड यील्ड भी 5.5 फीसदी के ऊपर चली गई, जबकि 2 साल की यील्ड 4.9 फीसदी से ऊपर रही।
- रुपये पर भी दबाव
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। शुरुआती कारोबार में रुपया 14 पैसे गिरकर 95.89 प्रति डॉलर पर आ गया। बाजार में अब यह चिंता बढ़ रही है कि रुपये पर दबाव बना रहा तो 96 प्रति डॉलर का स्तर भी टूट सकता है। तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और मजबूत डॉलर भारतीय करेंसी के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। हाल के दिनों में भी कच्चे तेल और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण रुपये पर दबाव देखा गया है।
- FII की बिकवाली बढ़ी
विदेशी निवेशको की बिकवाली भी बाजार की चिंता बढ़ा रही है। एफआई भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। एनएसई के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 3,694 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने बताया कि विदेशी निवेशकों ने जुलाई और अगस्त में खरीदारी की थी। इसके बाद सिंतबर में बिकवाली शुरू हो गई। इस महीने एफपीआई की बिकवाली 25,682 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।



















