खेजड़ी को राजस्थान का राज्य वृक्ष कहा जाता है इस पेड़ पर लगने वाली संकरी ना सिर्फ राजस्थान का ट्रेडिशनल फूड है बल्कि, इसमें स्वाद के साथ-साथ औषधीय गुण भी हैं. जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के जूलॉजी डिपार्टमेंट की एक शोध की रिपोर्ट के मुताबिक संगरी का उपयोग कई गंभीर बीमारियों में होने वाले कॉम्प्लिकेशंस को कम किया जाता है. इसको लेकर जूलॉजी डिपार्टमेंट आईआईटी जोधपुर के साथ रिसर्च हुआ. 

खरगोश पर किए गए प्रारंभिक शोध में इसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं. राजस्थान और खासकर मारवाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में खेजड़ी की फली संगरी से बनी सब्जी मारवाड़ में सदियों से उपयोग में लाई जा रही है. देश विदेश में भी राजस्थान की इस ट्रेडिशनल फूड को काफी पसंद किया जाता है. 

खास रिपोर्ट में जानें रेगिस्तान में खेजड़ी के पेड़ पर लगने वाली संगरी के बारे में, जिसे राजस्थान का ट्रेडिशनल फूड भी कहा जाता है और इतना ही नहीं इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. 

विज्ञान के इस दौर में सांगरी को मेडिसिंस के रूप में, जैन व्यास विश्वविद्यालय का प्राणी शास्त्र विभाग और आईआईटी मिलकर शोध कर रहे हैं अब तक के शोध में कई ऐसे रोचक तथ्य सामने आए हैं. जिसमें खरगोश पर किए गए शोध के आधार पर यह भी बताया गया है कि संगरी कोलेस्ट्रॉल को घटाने के साथ ही कहीं गंभीर रोगों में होने वाली कॉम्प्लिकेशन को भी कम करने में कारगर है. 

प्राणीशास्त्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर हीरालाल ने बात करते हुआ बताया कि अब तक का जो शोध हुआ है कई चीजें इसमें सामने आई है. संगरी में मोस्टली अलग-अलग टाइप्स के कंपाउंड्स हैं, जो पहले लोग यूज करते थे काम में लेते थे, वो लोग बहुत हेल्दी और स्वस्थ जीवन जी रहे थे. अब वर्तमान में जैसे-जैसे समय परिवर्तन हुआ डाइट परिवर्तन हुई, तो लोगों में बहुत सारी बीमारियां जैसे डायबिटीज है हाइपर कोलेस्ट्रॉल ये बीमारियां डेवलप हुई. उनके साथ में उनके डिफरेंट कॉम्प्लिकेशंस भी डेवलप हुए जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी है न्यूरोपैथी है. जिसमें मेमोरी लॉस होती है, विजन लॉस होता है. 

उन्होंने बताया कि हमने आईआईटी के साथ में उसके केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के साथ में मिलकर काम करना स्टार्ट किया. हमने उनके सैंपल्स आईआईटी बाम्बे भेज करके एनालिसिस करवाया. जब वो एनालिसिस करवाया तो हमको बहुत अच्छे कंपाउंड मिले, जो फ्लेवोन इट्स थे और उसके साथ में उसके डेरिवेटिव्स थे. 

पहले हमारा जो काम था वह कोलेस्ट्रॉल घटाने में था, जिसमें बहुत अच्छे रिजल्ट मिले और हमने इससे संबंधित बहुत अच्छे पब्लिकेशंस भी किए और निरंतर उसी दिशा में हम लोग कार्यरत हैं.

डायबिटीज में सबसे बड़ी प्रॉब्लम होती है कि पेशेंट की मेमोरी लॉस. वही पेशेंट आगे जाके अल्जाइमर,  पार्किंसन का प्रोन पेशेंट बन जाता है. हमारा टारगेट है कि कम से कम अपने खानपान में सुधार करके डायबिटीज के कॉम्प्लिकेशंस है को कम कर सकें.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें.)

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