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अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप ने दावा किया था कि ईरान अमरीका पर हमला करने वाला था, लिहाजा हमने ही आक्रमण कर उसे कुचल दिया। ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग नष्ट कर दी गई हैं। दूसरी तरफ अमरीकी युद्ध विभाग ‘पेंटागन’ ने वहां की संसदीय समिति को ब्रीफ किया है कि उसे ऐसी खुफिया लीड की जानकारी नहीं है कि ईरान की अमरीका पर हमले की कोई योजना थी। दरअसल यह कोई सामान्य विरोधाभास नहीं है। एक पक्ष सफेद झूठ बोल रहा है और टं्रप झूठ बोलने के आदी हैं। यह ‘टाइम’ पत्रिका की कवर स्टोरी से भी स्पष्ट है। बहरहाल अब अमरीकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने तो यहां तक खुलासा किया है कि ईरान राष्ट्रपति टं्रप की हत्या कराना चाहता था, लेकिन हमने ही उनके क्रूर, तानाशाह नेता खामेनेई को मार दिया। रक्षा मंत्री का यह भी दावा है कि एक सप्ताह में ईरान के आसमान पर अमरीका का कब्जा होगा। लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और विख्यात राजनयिकों के आकलन हैं कि ऐसा नहीं होगा। दरअसल राष्ट्रपति टं्रप ईरान युद्ध में, इजरायल के उकसावे में आकर, फंस गए हैं। अब वह चाह कर भी युद्ध से अलग नहीं हो सकते। इसकी बुनियादी दलील यह है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की हत्या के बावजूद ईरान अब भी जम कर लड़ रहा है। वह खामेनेई की हत्या का बदला लेने पर आमादा है। ईरान में फिलहाल कोई विद्रोह नहीं है। अलबत्ता अमरीका और इजरायल को सबक सिखाने के ‘हुंकारी आग्रह’ जरूर गूंज रहे हैं। बेशक ईरान में मरने वालों का आंकड़ा 1145 तक पहुंच चुका है। यह भयावह और खौफनाक आंकड़ा है, जो लगातार बढ़ रहा है। ईरान के शीर्ष 48 नेता और सैन्य कमांडर मारे जा चुके हैं। उसके 24 प्रांतों पर 1200 से अधिक मिसाइल हमले किए गए हैं।

ईरान के 153 शहरों की 504 जगहों पर बमबारी की गई है। उसके कमोबेश 20 युद्धपोत और 14 लड़ाकू विमान नष्ट किए जा चुके हैं। ईरान के चारों ओर खंडहरी इमारतें, मिट्टी-मलबा देखे जा सकते हैं, लेकिन ईरान की मिसाइलों और ड्रोनों ने अरब देशों के 27 अमरीकी बेस पर तबाही मचा रखी है। आग के गोले और धुएं के गहरे-काले गुब्बार दुनिया के सामने हैं। इजरायल में येरुशलम और राजधानी तेल अवीव जैसे शहरों में पचासियों इमारतें ध्वस्त कर दी गई हैं। रिहायशी इलाकों पर भी मिसाइलें दागी जा रही हैं। चीख-पुकार सुनी जा सकती हैं। सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी ‘अरामको’ रिफाइनरी पर दो बार हमले कर ईरान ने उसे पंगु बना दिया है। यहां 30 लाख बैरल तेल हर रोज रिफाइन किया जाता रहा है, लेकिन अब उत्पादन बंद करना पड़ा है। ईरान ने साइप्रस और तुर्किए में भी मिसाइल-ड्रोन हमले किए हैं। ईरान की हजारों बैलेस्टिक, क्रूज मिसाइलें अब भी बंकरों के नीचे मौजूद हैं। अब भी 6-7 यूनिट्स उत्पादन कर रही हैं। ईरान 20 फीसदी सवंद्र्धित यूरेनियम से ही परमाणु बम बना सकता है, जबकि उसके पास करीब 469 किग्रा सवंद्र्धित यूरेनियम है। बेशक वह 10-12 परमाणु बम बनाने की स्थिति में है। रूसी विदेश मंत्री के बयान से भी संकेत मिले हैं कि ईरान को परमाणु बम बनाने को बाध्य किया जा रहा है। एक आकलन सामने आया है कि अमरीका पर इस युद्ध से 19 लाख करोड़ रुपए तक का बोझ पड़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल तक उछल चुकी हैं। 100 डॉलर तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी, नतीजतन 50-210 अरब डॉलर की चोट लग सकती है। हालांकि तेल 147 डॉलर तक पहुंचने में देर लगेगी। जब ईरान ने जुलाई, 2008 में ‘शाहाब-3’ मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसकी रेंज 2000 किमी बताई गई थी, तब तेल 147 डॉलर तक उछला था। बहरहाल भारत को बेचैन नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम 41 देशों से तेल आयात करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग के अलावा भी कई रास्ते हैं, जिनके जरिए भारत तेल मंगवा सकता है।

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