कोलकाता : तृणमूल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ एक आरोपपत्र पेश किया। यह सब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार के खिलाफ भाजपा का पक्ष प्रस्तुत करने के कुछ ही समय बाद हुआ। इस दौरान टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि बंगाली एक बहुत ही गौरवशाली जाति हैं। हमने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। गुजराती कौन थे?… काला पानी में मारे गए और कैद किए गए लोगों में से 68% बंगाली थे, उसके बाद पंजाबी थे। वहां मौजूद किसी एक गुजराती का नाम बता सकते हैं? महुआ मोइत्रा के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बंगाली बनाम गुजराती की बहस छिड़ गई।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अमित शाह पर बंगालियों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आपने हर बंगाली को अपराधी घोषित कर दिया है… पहले आप हमारा अपमान करते हैं, फिर हमें वंचित करते हैं, फिर हमें अपराधी ठहराते हैं और फिर हमें परेशान करते हैं।

महुआ मोइत्रा ने क्या कहा

महुआ मोइत्रा ने कहा कि बंगाली एक गौरवशाली समुदाय हैं। हमने अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व किया। गुजराती कौन थे?… काला पानी में मारे गए और कैद किए गए लोगों में से 68% बंगाली थे, उसके बाद पंजाबी थे। क्या आप मुझे अपने महान नायक वीर सावरकर के अलावा, जो सिर्फ बैठकर माफीनामा लिखना चाहते थे, वहां मौजूद किसी एक गुजराती का नाम बता सकते हैं? कृपया हमें बताएं।

महुआ मोइत्रा के बयान की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। वहीं उनकी कही बात का कोट भी लोगों ने खूब शेयर किया। कई ने महुआ मोइत्रा का समर्थन किया तो कई ने खरी-खरी सुनाई। सोशल मीडिया पर लोग की आपस में बहस करने लगे। मुद्दा बंगाली बनाम गुजराती का हो गया।

महात्मा गांधी से लेकर सरदार पटेल तक का जिक्र

सोहम नाम के एक यूजर ने दादाभाई नौरोजी, श्यामजी कृष्ण वर्मा, भीखाजी कामा, महात्मा गांधी, अनसूया साराभाई, सरदार वल्लभभाई पटेल समेत लगभग 30 गुजरातियों के नाम लिखकर महुआ मोइत्रा को टैग किया और कहा कि इनके नाम आंख खोलकर पढ़ लें। यूजर ने लिखा कि उन्होंने गुजराती नेताओं से सवाल पूछे और गुजरातियों को बदनाम करने की कोशिश की, इसलिए मैं पूरी सूची के साथ जवाब दूंगा, लेकिन मुझे बंगाली बहनों और भाइयों के लिए बहुत सम्मान है, और उनके बोलने का तरीका दर्शाता है कि वह गुजरातियों से कितनी नफरत करती हैं।

‘वीर सावरकर मराठी थे’

रोजी नाम की एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘बेशर्मी…’ वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि वीर सावरकर गुजराती नहीं, मराठी थे। ये अज्ञानी लोग, जिन्हें अधूरी जानकारी है, जनता का प्रतिनिधित्व करते हुए और देश का नेतृत्व करने की कोशिश करते हुए इतने ऊंचे राजनीतिक पदों पर कैसे बैठे हैं? धिक्कार है इस पक्षपातपूर्ण संकीर्ण सोच और विचारधारा पर।

‘महुआ मोइत्रा ने नशा किया है क्या?’

पल्लवी नाम की एक यूजर ने सवाल पूछा, ‘क्या महुआ मोइत्रा ने कुछ नशा किया है?’ वह स्वतंत्रता संग्राम में गुजरात के योगदान पर सवाल उठाती हैं और वीर सावरकर को गुजराती कहती हैं। हेलो… गांधी जी और सरदार पटेल के बारे में सुना है? संकीर्ण सोच.. अंग्रेज़ी मैडम। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि महुआ मोइत्रा खुद बंगाली नहीं हैं। उनका जन्म असम में हुआ था।

यूजर्स ने बताया बकवास

शिवा दुबे नाम के एक अन्य युजर ने लिखा कि महुआ मोइत्रा जी महात्मा गांधी (पोरबंदर के गुजराती) को नकार देती हैं, जिन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया था। वे सरदार पटेल को भी नजरअंदाज करती हैं, जो गुजरात के लौह पुरुष थे और जिन्होंने भारत को एकजुट किया था। वे काला पानी आंदोलन के आंकड़ों को चुन-चुनकर अहिंसा का मजाक उड़ाती हैं, जबकि बंगाल के सशस्त्र क्रांतिकारियों का महिमामंडन करती हैं। सावरकर पर कीचड़ उछालना घटिया है। स्वतंत्रता एक राष्ट्रीय प्रयास था, न कि आपका बंगाल बनाम गुजरात का बकवास। एक सांसद के रूप में, इस तरह की क्षेत्रीय नफरत फैलाना घृणित है।

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