देश में विदेशी निवेशक जितना पैसा डाल रहे हैं, उससे ज्यादा बाहर ले जा रहे हैं। एक तरफ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) तेजी से आ रहा है, तो दूसरी तरफ वही निवेशक अपना पैसा तेजी से वापस भी ले जा रहे हैं। जनवरी, 2026 में लगातार छठे महीने देश का नेट विदेशी निवेश निगेटिव रहा, यानी कुल मिलाकर पैसा बाहर ज्यादा गया। फरवरी और मार्च में भी यही ट्रेंड जारी रहने की आशंका है।
कितना एफडीआई आया और गया
भारत में एफडीआई 2013-14 के 34 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 80 अरब डॉलर और 2025-26 के पहले 9 महीनों में 73.7 अरब डॉलर रहा, इसके बावजूद अगस्त 2025 से नेट एफडीआइ निगेटिव बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट
उधर देश के खजाने में लगातार गिरावट देखी जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च को समाप्त हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.28 अरब डॉलर घटकर 688.05 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले वाले हफ्ते में भी भंडार में 11.413 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज हुई थी, जिससे यह 698.346 अरब डॉलर पर आ गया था। इस गिरावट का सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा संपत्ति में कमी का रहा, जो 6.622 अरब डॉलर घटकर 551.072 अरब डॉलर रह गई। इन आंकड़ों में डॉलर के मुकाबले यूरो, पाउंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का असर भी शामिल है।
स्वर्ण भंडार भी घटा
इसी दौरान देश का सोने का भंडार भी 3.666 अरब डॉलर घटकर 113.521 अरब डॉलर रह गया । राहत की बात यह रही कि स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स 17 मिलियन डॉलर बढ़कर 18.649 अरब डॉलर हो गए और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास भारत की रिजर्व पोजीशन भी 17 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.816 अरब डॉलर हो गई। 27 फरवरी को यह भंडार 728.494 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, जिसके बाद से गिरावट का रुख देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में भंडार में उतार-चढ़ाव और लगातार गिरावट का दबाव बना हुआ है।



















