राजस्थान में नशे के खिलाफ चल रही जंग में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जोधपुर पुलिस ने ऐसा वार किया है, जिसने ड्रग माफियाओं की नींद उड़ा दी है. महज 48 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शहर की एक पॉश सोसाइटी आशापूर्णा प्लेटिनम में चल रही गुप्त ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है.

इस कार्रवाई में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2 करोड़ रुपये से अधिक कीमत की ड्रग्स, नशीली गोलियां और भारी मात्रा में केमिकल बरामद किए गए हैं. खास बात यह है कि यहां मिला 1.1 किलो से ज्यादा हाई-ग्रेड केमिकल, तैयार एमडी ड्रग से भी अधिक खतरनाक माना जा रहा है.

पॉश सोसाइटी में ‘मौत की लैब’

जिस जगह आमतौर पर लोग सुरक्षित और शांत जीवन की उम्मीद करते हैं, वहीं एक फ्लैट में ‘सफेद जहर’ तैयार किया जा रहा था. आशापूर्णा प्लेटिनम के फ्लैट नंबर A-803 में यह पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा था, जहां से ड्रग्स तैयार कर सप्लाई की जा रही थी.

ऐसे बना ऑपरेशन का मास्टर प्लान

इस हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन की रणनीति एडीजी दिनेश एमएन के निर्देशन में तैयार की गई. एसपी ज्ञानचंद यादव और एडिशनल एसपी नरोत्तम वर्मा के सुपरविजन में टीमों को सक्रिय किया गया. ASI राकेश जाखड़ और कांस्टेबल सुमेर सिंह की सटीक खुफिया सूचना इस पूरी कार्रवाई की कुंजी साबित हुई, जिसने पुलिस को सीधे ड्रग फैक्ट्री तक पहुंचा दिया.

पहली गिरफ्तारी से खुली बड़ी कड़ी

इस कहानी की शुरुआत 2 अप्रैल को बनाड़ क्षेत्र में हुई कार्रवाई से होती है, जहां गणपतराम विश्नोई को गिरफ्तार किया गया था.उसके घर की छत पर बनी ड्रग फैक्ट्री से 3 किलो से अधिक एमडी ड्रग्स,55 किलो से ज्यादा केमिकल बरामद हुए थे. पुलिस कस्टडी में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अमृतलाल जीनगर की मनोवैज्ञानिक पूछताछ के सामने गणपतराम ज्यादा देर टिक नहीं पाया.

कबूलनामे ने खोला राज

पूछताछ में गणपतराम ने जो खुलासा किया, उसने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं. उसने बताया कि मैं तो सिर्फ एक मोहरा हूं, असली खेल कोई और चला रहा है. और यहीं से सामने आया भरत विश्नोई उर्फ आसुराम उर्फ लक्की का असली नाम सामने आया.

मास्टरमाइंड का हाई-प्रोफाइल ठिकाना

गणपतराम के खुलासे के बाद पुलिस ने जब आशापूर्णा प्लेटिनम के फ्लैट पर दबिश दी, तो वहां से नशे का पूरा जखीरा बरामद हुआ. चौंकाने वाली बात यह रही कि मास्टरमाइंड अपनी पहचान छुपाकर एक महिला के साथ रह रहा था उसी फ्लैट से ड्रग्स बनाने और सप्लाई का पूरा नेटवर्क ऑपरेट हो रहा था

अब पॉश इलाकों में भी ड्रग सिंडिकेट

यह कार्रवाई एक बड़ा संकेत है कि अब नशे के कारोबारी सुनसान जगहों से निकलकर पॉश सोसाइटीज को अपना सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं, ताकि शक से बचा जा सके. जोधपुर में ‘सफेद जहर’ का यह नेटवर्क जितना खतरनाक था, उतनी ही सटीकता से पुलिस ने उसे ध्वस्त किया है. लेकिन यह भी साफ हो गया है कि नशे का कारोबार अब नए-नए रूप और ठिकाने बदल रहा है, जिससे निपटने के लिए ऐसी ही तेज और लगातार कार्रवाई जरूरी है.

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