रायपुर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में उज़्बेकिस्तान यात्रा के प्रमुख निष्कर्षों को साझा करने एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अवसरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ करने के सतत प्रयासों का हिस्सा है।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के औपचारिक स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रोफेसर हुलास पाठक ने 28 फरवरी से 10 मार्च तक माननीय कुलपति के नेतृत्व में किए गए उज़्बेकिस्तान भ्रमण के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इस यात्रा के दौरान कृषि, एग्रीबिजनेस, ग्रामीण विकास, उद्यमिता एवं नवाचार के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त हुईं तथा भविष्य में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ सामने आई हैं।

इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य उज़्बेकिस्तान यात्रा से प्राप्त अनुभवों को, विभागाध्यक्षों, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों तक पहुँचाना तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय अवसरों के प्रति जागरूक करना था। साथ ही, छात्रों को वैश्विक स्तर पर शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के अवसरों में भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं अनुसंधान तंत्र से संबंधित संभावित सहयोग क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई। इसमें छात्र एवं संकाय विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ तथा विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी जैसे विषय प्रमुख रहे।
संगोष्ठी में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही वित्तीय सहायता योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों को उड़ान योजना के तहत विदेशों में शोध एवं प्रशिक्षण के अवसरों तथा प्राध्यापकों को उत्कर्ष योजना के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु वित्तीय सहायता के बारे में अवगत कराया गया। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक बाधाओं को कम करते हुए अधिक से अधिक शिक्षकों एवं छात्रों को वैश्विक मंच पर अवसर प्रदान करना है।

कार्यक्रम के दौरान कृषि महाविद्यालय, रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ने तथा छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरित किया। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुभव विद्यार्थियों के करियर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जी. के. दास ने छात्रों को अपनी क्षमता पहचानने एवं वैश्विक अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों एवं अधिकारियों ने भी छात्रों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय अवसरों का लाभ उठाकर अपने कौशल का विकास करें और विश्वविद्यालय तथा राज्य का गौरव बढ़ाएँ। इस संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संजय द्विवेदी द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ. सुनील नायर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय की वैश्विक उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।




















