पणजी: गोवा में एक पुराने स्मारक का नया नाम रखने पर सरकार को अब विरोध का सामना करना पड़ रहा है। गोवा सरकार ने हाल ही में जारी एक नोटिफिकेश में पुराने गोवा में 16वीं सदी के एक पिल्लरी को पेलोरिन्हो नोवो या न्यू पिल्लरी के बजाय अनऑफिशियल कोंकणी नाम हट कात्रो खंबो (हाथ से काटा गया खंभा) का इस्तेमाल किया। इसको लेकर अब इतिहासकारों ने ऐतराज जताया है। इतिहासकारों ने यह भी आरोप लगाया है कि आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट एक ‘गुमराह करने वाली कहानी’ को बढ़ावा दे रहा है।
नोटिफिकेशन में कोंकणी नाम
काले बेसाल्ट का यह अकेला खंभा बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस के पास एक बिजी चौराहे पर खड़ा है। ये अब गोवा के पुराने शहर में कंक्रीट फ्लाईओवर की छाया में है। यह ढांचा एक पुराने गोल चबूतरे पर टिका है और उस पर एक पत्थर की पट्टिका लगी है जो इसे पेलोरिन्हो नोवो के तौर पर पहचानती है। लेकिन आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के 5 मार्च के नोटिफिकेशन में यह नाम हट कात्रो खंबो था। इस नोटिफिकेशन में उन 15 जगहों की लिस्ट थी जिन्हें सुरक्षा की जरूरत थी। नोटिफिकेशन में सरकार ने बताया कि इन पुराने स्मारकों/आर्कियोलॉजिकल जगहों और बचे हुए हिस्सों को सुरक्षित स्मारक/सुरक्षित इलाका घोषित करने का उसका इरादा है।
इतिहासकार ने सरकार को लिखा लेटर
इतिहासकार डेल लुइस मेनेजेस ने इस मुद्दे पर सरकार को एक लेटर लिखा। उन्होंने लेटर में कहा कि यह साफ नहीं है कि डिपार्टमेंट ने किस आधार पर एक ऐसे स्मारक के लिए ऊपर बताए गए नाम या नामकरण को नोटिफाई किया है जिसे हमेशा पेलोरिन्हो नोवो के नाम से जाना जाता था। उन्होंने कहा कि डिपार्टमेंट को नाम चुनने के बारे में बताना होगा।
डिपार्टमेंट करेगा फीडबैक की जांच
आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर नीलेश फाल देसाई ने कहा कि डिपार्टमेंट दो महीने के आखिर में लोगों से मिले फीडबैक की जांच करेगा और सरकार को अपनी सिफारिशें देगा। नीलेश फाल देसाई ने कहा कि ऑब्जेक्शन जमा करने का समय खत्म होने के बाद, डिपार्टमेंट पूरी स्टडी करके अपने कमेंट्स के साथ सरकार को एक डिटेल्ड रिपोर्ट जमा करेगा। दोनों तरफ से ऑब्जेक्शन मिले हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके डिपार्टमेंट को ‘दोनों तरफ से’ रिप्रेजेंटेशन मिले हैं।



















