रायगढ़ा: ओडिशा के रायगढ़ा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां वेदांता ग्रुप से आने वाली बॉक्साइट माइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी एक सड़क के निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों और पुलिस में झड़प हो गई। इस घटना में 58 पुलिसकर्मी समेत 70 लोग घायल हो गए। स्थानीय लोगों के पास कुल्हाड़ी समेत कई अन्य धारदार हथियार थे।
सड़क निर्माण को लेकर हुई पूरी घटना
यह पूरी घटना एक प्रस्तावित 3 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर हुई। इसे स्थानीय लोग पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील सिजीमाली पहाड़ियों में खनन की शुरुआत मानते हैं। स्थानीय लोग लंबे समय से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। उन्हें डर है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से उन्हें विस्थापित होना पड़ सकता है। इसके साथ ही उन्हें लगता है कि इस प्रोजेक्ट की वजह से उनके वन अधिकारी छीने जाएंगे और उनकी पारंपरिक आजीविका को नुकसान पहुंचेगा।
पुलिस की टीम सुदर्शन माझी को आई थी पकड़ने
अधिकारियों ने बताया कि स्थिति तब और बिगड़ गई, जब कथित तौर पर प्रदर्शनकारी हिंसक हो उठे। यह घटना तब हुई, जब सुबह के समय पुलिस की एक टीम कांतमाल गांव में सुदर्शन माझी नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंची थी। सुदर्शन माझी कई मामलों में वांछित एक संदिग्ध है और वह उन लोगों में से एक है, जो इस खनन परियोजना का विरोध कर रहा है।
पुलिस लाठीचार्ज में 8 घायल
एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि पुलिस लाठीचार्ज में आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कई अन्य लोगों को भी चोटें आईं। खनन-विरोधी कार्यकर्ता प्रफुल्ल सामंतारा ने ‘शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस की ज्यादतियों’ की निंदा की और निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके साथ ही रायगढ़ा के कलेक्टर आशुतोष कुलकर्णी ने इलाके का दौरा किया और शांति बनाए रखने की अपील की।
वेदांता को 2023 में मिली थी यह खदान
वेदांता के एक अधिकारी ने कहा कि इस घटना पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, क्योंकि कंपनी ने अभी तक खनन कार्य शुरू नहीं किया है। वेदांता को यह खदान 2023 में मिली थी। 300 मिलियन टन से अधिक अनुमानित यह भंडार, 18 गांवों में 1,549 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह रायगड़ा और कालाहांडी जिलों में 20 से अधिक आरक्षित वनों और नौ जल निकायों के अंदर या उनके पास स्थित है। ये दोनों ही ‘पांचवीं अनुसूची’ वाले क्षेत्र हैं, जहां मुख्य रूप से आदिवासी आबादी रहती है। पिछले हफ्ते भी तनाव भड़क गया था, जब अधिकारियों के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके चलते अधिकारियों को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी थी।



















