भुवनेश्वर: राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने बीजेडी के संसदीय दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष के चलते उन्होंने यह कदम उठाया है। दरअसल एक दिन पहले ही बीजेपी के चार सांसदों ने पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक को पत्र लिखकर उन्हें इस पद से हटाने की मांग की थी। पार्टी सांसदों के उनकी नेतृत्व क्षमता के प्रति बढ़ते असंतोष को देखते हुए सस्मित पात्रा ने नवीन पटनायक को अपना इस्तीफा सौंप दिया। बता दें कि सस्मित 2022 से इस पद पर आसीन थे।
पटनायक के पास आए दो पत्र
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि बीजेडी नए सदन नेता के तौर पर संतृप्त मिश्रा या मानस मंगराज में से किसी एक को नामित कर सकती है। माना जाता है कि दोनों ही पार्टी नेतृत्व का पूरा भरोसा रखते हैं। पात्रा के इस्तीफे की पुष्टि करते हुए सूत्रों ने बताया कि अब नवीन पटनायक के पास दो पत्र आए हैं। एक पत्र में पात्रा को पद से हटाने की मांग की गई है। वहीं दूसरे पत्र में पात्रा ने अपना इस्तीफा सौंपा है। उम्मीद है कि वह जल्द ही इस पर कोई फैसला लियाजाएगा। बीजेडी के वर्तमान में राज्यसभा में छह सांसद है। इनमें सुभाशीष खुंटिया, सुलता देव और देबाशीष सामंतराय शामिल हैं।
क्यों देने पड़ा इस्तीफा
- शांत स्वभाव वाले पात्रा दिल्ली में बीजेडी नेतृत्व के विचारों को मजबूती से रखते रहे हैं।
- हाल ही में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा बीजू पटनायक को सीआईए से जोड़ने वाले बयान के बाद उठे विवाद में उनकी भूमिका को पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं माना गया।
- दुबे ने 27 मार्च को संसद परिसर के बाहर यह बयान दिया था।
- सस्मित पात्रा ने अगले दिन यानी 28 मार्च को प्रतिक्रिया देते हुए दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया।
बीजेडी सांसदों के बीच मतभेद भी उभरकर सामने आए
सूत्रों के अनुसार, पिछले वर्ष राज्यसभा में वक्फ विधेयक को लेकर पार्टी के रुख के बाद बीजेडी सांसदों के बीच मतभेद भी उभरकर सामने आए थे। उस समय पार्टी ने पहले इस विधेयक का विरोध करने की बात कही थी। लेकिन बाद में अपना रुख बदलते हुए निर्णय को सांसदों की व्यक्तिगत अंतरात्मा पर छोड़ दिया था।



















