Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को वरुथिनी एकादशी कहा जाता है. ‘वरुथिनी’ का अर्थ ‘कवच’ या ‘रक्षा करने वाला’ होता है. माना जाता है कि जो भी भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से उपवास रखता है और श्री नारायण की पूजा करता है, भगवान विष्णु स्वयं एक कवच की तरह उसकी हर संकट से रक्षा करते हैं.

पौराणिक कथा

बहुत समय पहले की बात है. नर्मदा नदी के तट के पास एक नगर में राजा मान्धाता का शासन हुआ करता था. वे केवल एक राजा ही नहीं, बल्कि एक महान तपस्वी और दानवीर भी थे. वे अक्सर अपने राजमहल से बाहर जंगलों में अकेले साधना करने जाया करते थे.

भालू ने किया राजा पर हमला

एक बार राजा जंगल में एक पेड़ के नीचे आंखें बंद कर तपस्या कर रहे थे. तभी वहां एक भूखा जंगली भालू आ पहुंचा. भालू ने राजा को देखा और उन पर हमला कर दिया तथा उनके पैर को अपने जबड़ों में जकड़कर चबाने लगा.

राजा ने भगवान विष्णु को पुकारा

असहनीय दर्द होने के बावजूद राजा मान्धाता न तो चिल्लाए और न ही उन्हें भालू पर गुस्सा आया. एक सच्चे तपस्वी की तरह उन्होंने सोचा, “हिंसा करना मेरा धर्म नहीं है.” अपनी रक्षा के लिए किसी हथियार को उठाने के बजाय उन्होंने मन से भगवान विष्णु को पुकारा.

भक्त की रक्षा के लिए प्रकट हुए नारायण

भक्त की पुकार सुनकर भगवान श्रीहरि वहां प्रकट हुए और अपने सुदर्शन चक्र से भालू का वध कर दिया. लेकिन तब तक भालू राजा का पैर काफी हद तक खा चुका था. अपना कटा हुआ पैर देखकर राजा बहुत दुखी हो गए.

तब भगवान विष्णु ने कहा, “हे राजन! उदास मत हो. तुम्हारे साथ जो हुआ, वह तुम्हारे पिछले जन्म के कुछ गलत कर्मों का फल था. लेकिन तुम्हारी भक्ति ने तुम्हें बड़े संकट से बचा लिया है.” भगवान ने राजा से कहा, “तुम मथुरा जाओ और वहां वरुथिनी एकादशी का व्रत करो. मेरे ‘वराह अवतार’ की पूजा करो. इस व्रत की शक्ति से तुम्हारा शरीर पहले जैसा स्वस्थ हो जाएगा.”

राजा नें रखा व्रत

राजा मान्धाता ने ठीक वैसा ही किया. उन्होंने मथुरा जाकर पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा. व्रत के प्रभाव से एक अद्भुत चमत्कार हुआ, राजा का पैर फिर से जुड़ गया और वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए. इसी व्रत के पुण्य प्रताप से अंत में उन्हें स्वर्ग में स्थान मिला.

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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