रायपुर। नगर निगम के जोन-10 के अमलीडीह कार्यालय से 100 एकड़ जमीन से जुड़ी 69 फाइलों के गायब होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आया हैं कि बिना सक्षम अनुमति के प्रस्ताव भेजे गए, नक्शों में गड़बड़ी की और संबधित फाइलें ही गायब हो गईं। सिर्फ चार अधिकारियों को ही निलंबित किया हैं। इसमें कूटरचना और षड्यंत्र की आशंका जताई हैं। वहीं पूर्व महापौर ने इसे 100 करोड़ रूपए से ज्यादा के घोटाले से जोड़ते हुए ईओडब्ल्यू जांच की मांग की हैं।
बिना अनुमति भेजा प्रस्ताव: रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि जोन-10 के जाने आयुक्त ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 17 नवंबर 2025 को टाडन एंड कंट्री प्लानिंग को प्रस्ताव भेज दिया। यह प्रस्ताव निगम आयुक्त की अनुमति, मुख्यालय की जांच के बिना ही अग्रेषित किया जो नियमों का सीधा उल्ल्ंाघन हैं। नियमानुसार ऐसे प्रस्तावोंं की स्वीकृति का अधिकार केवल निगम आयुक्त को होता हैं।
अवैध प्लाटिंग वाले क्षेत्रों को ही अनुमोदन के लिए भेजा: जांच में यह भी सामने आया कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध प्लांटिग जारी थी, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा अवैध प्लांटिग वाले क्षेत्रों को ही प्रस्ताव में शामिल कर अनुमोदन के लिए भेज दिया। धारा 292 के तहत कार्रवाई नहीं करना भी गंभीर लापरवाही मानी गई हैं।
नक्शे और जमीन में भारी अंतर: समिति ने निरीक्षण कर पाया कि प्रस्तावित नक्शे और वास्ताविक स्थिति में बड़ा अंतर हैं। कई जगहों पर बने मकान नक्शें मे दर्शाए ही नहीं गए थे, जबकि सडक़ो की चौड़ाई और प्लाट के आकार भी गलत दिखाए गए। गूगल इमेज के आधार पर भी जांच में कई दावे भ्रामक पाए गए।



















