नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राजधानी में पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र के विस्तार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सेंट्रल रिज क्षेत्र के लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित कर दिया है। यह अधिसूचना भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 20 के तहत जारी की गई है। यह क्षेत्र वन विभाग के वेस्ट जोन के अधीन आता है और यह सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति भवन एस्टेट के आसपास के हिस्सों से जुड़ा हुआ है।
पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस निर्णय को दिल्ली की प्राकृतिक विरासत, जैव विविधता और पर्यावरण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील रिज क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने का विषय कई दशकों से लंबित था, जिसे हमारी सरकार ने पूरा किया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अब तक कुल 4754.14 हेक्टेयर रिज क्षेत्र को आरक्षित वन का दर्जा दे चुकी है। इससे पहले 24 अक्टूबर 2025 को दक्षिणी रिज क्षेत्र के लगभग 4080.82 हेक्टेयर क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया गया था।
लंबे समय से नहीं मिल पाया था कानूनी संरक्षण
सीएम के मुताबिक 1994 में दिल्ली के सभी पांच रिज क्षेत्रों को भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 के तहत अधिसूचित किया गया था, लेकिन लंबे समय तक इन्हें अंतिम कानूनी संरक्षण नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि तीन दशक से अधिक समय से लंबित प्रक्रिया अब पूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि सेंट्रल रिज राजधानी के मध्य में स्थित है और अपर रिज रोड के दोनों ओर फैला हुआ है। यह क्षेत्र दिल्ली रिज प्राचीन अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार है और इसे राजधानी के ‘ग्रीन लंग्स’ के रूप में जाना जाता है।



















