कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के गलियारे शनिवार को एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक बदलाव के गवाह बने। विधानसभा के उत्तर-पूर्वी कोने में स्थित मुख्यमंत्री के प्रतिष्ठित चैंबर में अब पुरानी सरकार का कोई नामोनिशान बाकी नहीं रहा। सत्ता की इस अदला-बदली को स्थानीय राजनीतिक जानकार ‘किस्सा कुर्सी का’ बताकर असली क्लाइमेक्स कह रहे हैं।
कुर्सी का पावर गेम
सबसे बड़ा बदलाव सीएम चैंबर की उस कुर्सी में हुआ, जिस पर पिछले 13 सालों से ममता बनर्जी बैठती आ रही थीं। शनिवार सुबह उस कुर्सी को चैंबर से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह वह कुर्सी लाई गई, जिसका उपयोग सुवेंदु अधिकारी 17वीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर करते थे। विधानसभा के एक अधिकारी ने टिप्पणी की, ‘कुर्सी सिर्फ फर्नीचर नहीं, बल्कि सत्ता का प्रतीक होती है। हर नेता की अपनी पसंद और कंफर्ट होता है।’
हटाई गईं तस्वीरें और नेमप्लेट
लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीम ने सुबह से ही विधानसभा परिसर में सफाई अभियान शुरू कर दिया था। ममता बनर्जी की नेमप्लेट को हटाकर सुवेंदु अधिकारी की नई नेमप्लेट लगा दी गई है। इसके साथ ही विभिन्न मंत्रियों के कमरों में लगी पूर्व मुख्यमंत्री की तस्वीरों को भी उतार दिया गया है। नए कैबिनेट मंत्रियों के कमरों के बाहर लगी नेमप्लेट फिलहाल ढकी हुई हैं, जिनका अनावरण जल्द किया जाएगा।
पहले दिन का बदला शेड्यूल
विधानसभा में शनिवार सुबह भारी गहमागहमी थी। उम्मीद थी कि सुवेंदु अधिकारी शपथ के बाद सीधे विधानसभा पहुंचेंगे और अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग करेंगे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और रवींद्रनाथ टैगोर की विशाल प्रतिमा के सामने उनके स्वागत की तैयारी थी। हालांकि, आखिरी समय में सीएम का शेड्यूल बदल गया। वे विधानसभा के बजाय टैगोर की जन्मस्थली ‘जोरासांको’ पहुंचे और वहां श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने कार्यकाल की शुरुआत की।



















