What's Hot

प्रधानमंत्री मोदी ने अपना काफिला कम कर उदाहरण पेश किया है। बुधवार को दो वीडियो सामने आए। एक में काफिले में मात्र दो कारें थीं और दूसरे वीडियो में 4 कारें दिखाई दीं। यह किफायत नहीं, जोखिम है। प्रधानमंत्री से ऐसी कोई अपेक्षा और शिकायत नहीं थी। प्रधानमंत्री एसपीजी के सुरक्षा-कवच में रहते हैं। उस सुरक्षा का अपना प्रोटोकॉल होता है, लिहाजा काफिले में 15 या 20 कारें हैं, इस पर सवाल उठाना ही बेमानी है। प्रधानमंत्री की सुरक्षा से किसी भी किस्म का समझौता नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री की नजीर का अनुसरण रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, सडक़ परिवहन मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने किया है, लेकिन पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और बिहार के ‘भगवा मुख्यमंत्री’ सम्राट चौधरी अब भी 19-20 कारों के काफिले के साथ घूमते नजर आए हैं। बहरहाल उन्हें भी जल्द ही सद्बुद्धि आ जाएगी। काफिलों की किफायत और अन्य व्यवस्थाएं स्थायी होनी चाहिए, भेड़चाल या ढोंग के मायने बेहद खतरनाक होंगे। बचत प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों, सांसदों, विधायकों आदि तक ही अपरिहार्य नहीं होनी चाहिए। सरकारों में सचिव, अतिरिक्त सचिव, संयुक्त सचिव, निदेशक स्तर के आईएएस, आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग सरकारी वाहन दिए गए हैं। कटौती उनमें बहुत जरूरी है। वे सभी 2-4 किमी दूर के सरकारी आवासों से दफ्तर तक आते हैं और फिर घर लौटते हैं। सरकारी वाहनों की ऐयाशी और भौकाल खत्म किए जाने चाहिए। ऐसे अधिकारियों को एक विशेष बसनुमा वाहन से दफ्तर लाया जाए और शाम को घर छोड़ा जाए। यह संवैधानिक प्रोटोकॉल नहीं है कि सभी अफसर ‘महाराज’ की तरह सुविधाएं भोगें। यदि देश में पेट्रोल-डीजल का संकट है, तो किफायत अपरिहार्य है। आपातस्थिति के लिए तो छूट हमेशा बनी रही है। दरअसल ये अधिकारी ही हमारी व्यवस्था के नीति-निर्माता हैं, लिहाजा निरंकुश-से हैं।

बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ऑनलाइन बैठकों की अपील की है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरह कुछ मुख्यमंत्रियों ने इस व्यवस्था को लागू करने के आदेश भी जारी करवा दिए हैं, तो ये आला अफसर भी अमल करें। यदि प्रधानमंत्री की पूरी अपील को स्वीकार कर लागू किया जाए, तो साल भर में 11.5 लाख करोड़ रुपए की बचत हो सकती है। यह बहुत बड़ी राशि है। यदि काफिला छोटा कर तेल बचाया जाता रहा, तो साल भर में करीब 91,250 लीटर डीजल बचेगा। इस तरह 1 करोड़ रुपए की बचत की जा सकेगी। यह शोशेबाजी, रुतबेबाजी अब छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि ईरान युद्ध से उपजे संकट भारत की दहलीज तक आ गए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक सार्वजनिक मंच से कहा है कि यदि ईरान युद्ध जारी रहा और लंबा खिंचा, तो सरकार को पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम बढ़ाने पड़ेंगे। रसोई गैस का सिलेंडर भी महंगा होगा, क्योंकि ये सभी आयातित हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी बड़े दुखी अंदाज में खुलासा कर रहे हैं कि देश की तेल कंपनियों को 1000 करोड़ रुपए हररोज का औसतन घाटा झेलना पड़ रहा है। युद्ध के 75 दिनों में यह घाटा 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। निश्चित है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो उन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता। बुधवार को कच्चे तेल के दाम 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। हालांकि युद्ध के इस अंतराल में 98 देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। 40 देशों को तेल से जुड़े प्रोटोकॉल लागू करने पड़े हैं। अमरीका, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, रूस समेत वियतनाम, फिलीपींस, बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड आदि देशों को पेट्रो उत्पादों की राशनिंग करनी पड़ी है और कई प्रोटोकॉल लागू करने पड़े हैं। भारत ने इन 75 दिनों में यह बोझ अपनी जनता पर पडऩे नहीं दिया है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। अब संकट बढ़ता जा रहा है, तो शुरुआत बचत से की जा रही है। बचत के ऐसे आह्वान लालबहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, डा. मनमोहन सिंह सरीखे प्रधानमंत्रियों ने भी किए थे। अब आईएमएफ के मानकों के मुताबिक, भारत अभी गंभीर संकट में नहीं है, करीब 11 माह के आयात के लिए विदेशी मुद्रा पर्याप्त है, लेकिन डॉलर की तुलना में ‘रुपया’ 96 के करीब पहुंच चुका है, आयात के लिए 34,000 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान करना पड़ा है, लिहाजा सावधान होना तो जरूरी है। यह बात भी सामने आ रही है कि पेट्रोल-डीजल, सोना तथा अन्य सामान, खाद्य पदार्थ भी महंगे होने लगे हैं। सरकार को कोशिश यह करनी है कि जरूरी चीजें महंगी न हों।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031