नई दिल्ली. भारत की अगुवाई में चल रहे ब्रिक्स देशों के सम्मेलन में इस बार कई बातें खास रहीं. पिछले साल ब्राजील में हुई बैठक के दौरान जब ब्रिक्स के मंच से नई मुद्रा लाने की बात कही तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह भड़क गए थे. इससे सबक लेते हुए ब्रिक्स संगठन ने इस बार ऐसा पैंतरा खेला कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूट. ब्रिक्स ने डॉलर को सीधे तौर पर चुनौती भी नहीं दी और ऐसा दांव मारा कि अमेरिकी करेंसी पर उसकी निर्भरता भी कम हो जाए. यही वजह है कि ब्रिक्स के सम्मेलन में अभी तक हुई बातचीत पर ट्रंप पूरी तरह खामोश हैं.

ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर्स की बैठक में डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा तो हुई लेकिन कोई साझा मुद्रा या डॉलर को हटाने का कोई उल्लेख नहीं किया गया. ब्रिक्स के इस बयान में डॉलर का विकल्प पैदा करने के बजाय अपनी लोकल करेंसी में ही व्यापार और निवेश करने तथा सीमा-पार भुगतान व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया. ब्रिक्स देशों के साझा बयान में न तो ब्रिक्स की साझा मुद्रा का कोई उल्लेख है और न ही डॉलर को हटाने का कोई औपचारिक आह्वान किया गया है. इसके बजाय ब्रिक्स ने इंटरऑपरेशनल पेमेंट सिस्टम, लोकल करेंसी में लेनदेन और सभी सदस्यों के बीच स्वैच्छिक सहयोग की बात की गई, जो अपने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हैं.

ब्रिक्य ने भुगतान सिस्टम पर दिया जोर
ब्रिक्स देशों की ओर से जारी साझा बयान में कहा गया है कि ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स (बीपीटीएफ) ने सीमा पर भुगतान के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशना शुरू कर दिया है. ब्रिक्स देशों ने कहा कि हम बीपीटीएफ को जारी काम के आधार पर चर्चा आगे बढ़ाने और ब्रिक्स देशों के बीच सीमा-पार भुगतान के लिए ऐसे व्यावहारिक समाधान तलाशने को प्रोत्साहित करते हैं, जो तेज, कम लागत वाले, अधिक सुलभ, दक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित हों.

ईरान ने पहले ही भुगतान पर भर दी हामी
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में शुक्रवार को ही ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि सीमित संख्या में मुद्राओं पर निर्भर मौजूदा वित्तीय प्रणाली राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है. उन्होंने एनडीबी के जरिये डॉलर पर निर्भरता कम करने वाले लेनदेन को बढ़ावा देने की भी वकालत की. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रतिबंधों और अन्य उपायों के जरिये अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सीमित करने के प्रयासों का जिक्र करते हुए ब्रिक्स के लिए ग्लोबल ग्रोथ का नया और टिकाऊ मंच बनाने की जरूरत बताई. इसके अलावा भारत ने भी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और भुगतान प्रणालियों को जोड़ने का समर्थन किया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के भुगतान तंत्र को जोड़ने और भारत के यूपीआई जैसे ढांचे का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया.

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