नई दिल्ली। धार भोजशाला को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कहा कि भोजशाला परिसर मंदिर ही है। मस्जिद पक्ष को अलग जमीन दी जाएगी। इसके लिए मस्जिद पक्ष सरकार से याचिका करे।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करते हुए इसे मंदिर माना है। मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे।

कोर्ट ने अंतरसिंह की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने कोर्ट से मांग की थी कि दोनों पक्षों में सौहार्द बना रहे, इस तरह की व्यवस्था का आदेश दिया जाए।

मंदिर पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिला। 

भोजशाला का फैसला हिंदू पक्ष में आते ही इंदौर के हाई कोर्ट गेट 3 के सामने समर्थक जश्न मनाते हुए।

सुप्रीम कोर्ट जाएगा मस्जिद पक्ष

धार भोजशाला में अब नमाज पर रोक लग गई है, अब सिर्फ यहां पूजा होगी। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ ही अरशद वारसी और शोभा मेनन ने पक्ष रखा था। मंदिर पक्ष की ओर से विष्णु शंकर जैन और मनीष गुप्ता ने तर्क प्रस्तुत किए थे। अब मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।

हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले को लेकर पिछले चार साल से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब हाई कोर्ट ने धार भोजशाला को मंदिर करार दिया है। इस फैसले के बाद से हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है।

विवाद में वाग्देवी प्रतिमा भी बड़ा मुद्दा

विवाद में मां वाग्देवी की प्रतिमा का मुद्दा भी प्रमुख रहा है। रिकार्ड के अनुसार 1875 में खुदाई के दौरान प्रतिमा मिलने का उल्लेख है। बाद में ब्रिटिश अधिकारी इसे इंग्लैंड ले गए। हिंदू संगठनों ने कई बार प्रतिमा को वापस भारत लाने की मांग उठाई। अब हाई कोर्ट ने भी कह दिया है कि सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे।

अलर्ट मोड पर पुलिस महकमा

फैसले के बाद धार जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी तरह सतर्क और हाई अलर्ट पर हैं। जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

गुरुवार रात से ही शहर में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए गए हैं तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 प्रभावी कर दी गई है। संभावित निर्णय के बाद किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया, विरोध या अफवाह की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

भोजशाला परिसर सहित शहर के प्रमुख चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों और छप्पन इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस की लगातार गश्त जारी है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

भारतीय संस्कृति, सत्य और सनातन की जीत- मंत्री

मध्य प्रदेश के मंत्री राकेश सिंह ने कहा, “यतो धर्मस्ततो जयः धार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर भोजशाला को माँ वाग्देवी मंदिर मानते हुए माननीय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिया गया निर्णय भारतीय संस्कृति, सत्य और सनातन की जीत है. राजा भोज की गौरवशाली विरासत से जुड़ी इस पावन भूमि पर हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना करोड़ों सनातनियों की भावनाओं का सम्मान है. यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक चेतना और विरासत संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. जय माँ वाग्देवी!

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?

धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को सुलझाएगा और इस आदेश को रद्द करेगा. बाबरी मस्जिद मामले के फैसले से इसमें स्पष्ट समानताएं हैं.””

 दोनों पक्षों से शांति की अपील- प्रशासन

भोजशाला मामले में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद DIG मनोज कुमार सिंह और कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है. कोई अफवाह ना फैसले इसलिए सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है. दोनों पक्षों की वरिष्ठ लोगों सेबातचीत करके अपने-अपने लोगों से शांति स्थापित करने की अपील की जा रही है.

 हम सभी की श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक है- कृष्णपाल सिंह यादव

पूर्व सांसद कृष्णपाल सिंह यादव ने कहा, “जय वाग्देवी. धार भोजशाला मंदिर है— माननीय हाई कोर्ट. मां वाग्देवी की पावन भूमि भोजशाला हम सभी की श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक है.”

अमूल्य, अविस्मरणीय और आस्था के तेज से आलोकित अवसर- कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “सत्य सनातन धर्म की जय. हृदय आज गर्व, गौरव और आत्मिक आनंद से परिपूर्ण है. माननीय उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई एवं प्रस्तुत साक्ष्यों के गहन परीक्षण के उपरांत धार स्थित भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्वीकार किया है. यह क्षण हम सभी के लिए इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अंकित होने वाला अमूल्य, अविस्मरणीय और आस्था के तेज से आलोकित अवसर है. यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक चेतना, सनातन परंपरा और सभ्यता के स्वाभिमान का सम्मान है. यह सत्य, श्रद्धा और इतिहास की पुनर्प्रतिष्ठा का महत्वपूर्ण पल है. आप सभी को बहुत बहुत बधाई. जय माँ वाग्देवी.”

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