पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच इस बात की आशंका पहले से जताई जा रही थी कि तेल और गैस की कमी की वजह से आने वाले दिनों में जरूरी वस्तुओं की महंगाई बढ़नी तय है। खासतौर पर रसोई गैस की किल्लत की वजह से आम लोगों के सामने कैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, यह सब जानते हैं। इस दौरान देश में ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से थोक महंगाई दर अप्रैल में 8.3 फीसद दर्ज की गई, जो मार्च में 3.88 फीसद थी। साफ है कि घरेलू बाजार पर अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर पड़ना शुरू हो चुका है।

हालांकि कुछ समय पहले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर और विमानन टर्बाइन ईंधन के दाम में खासी बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन उसके असर का दायरा कुछ हद तक सीमित था। अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफे का मोर्चा जिस तरह खुला है, उससे साफ है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच टकराव के साए में तेल की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रही, तो इसका असर जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित करेगा। गौरतलब है कि तेल कंपनियों की ओर से शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। वहीं सीएनजी की कीमत में भी दो रुपए प्रति किलोग्राम का इजाफा किया गया।

जाहिर है, ईरान पर इजराइल और अमेरिका के साझा हमले के बाद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में जिस तरह की तेजी आई है, अब तेल कंपनियां आम उपभोक्ताओं पर भी उसका बोझ सीधे डालना शुरू कर चुकी हैं। यों जब ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को बाधित किया था और दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के तेलशोधन केंद्रों और ठिकानों पर मिसाइल दागे गए, तभी से यह साफ था कि इसका असर दुनिया भर में होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ेगा और नतीजतन सभी क्षेत्रों में महंगाई बढ़ेगी। खासतौर पर उन देशों में ज्यादा मुश्किल पैदा हो सकती है, जहां तेल और गैस की आपूर्ति को सहज बनाए रखने के विकल्प सीमित हैं। दरअसल, होर्मुज जलमार्ग से दुनिया भर में लगभग बीस से पच्चीस फीसद तेल और गैस की आपूर्ति होती है और इसी वजह से इसके बाधित होने के प्रभाव का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। स्वाभाविक रूप से भारत में भी तेल और गैस की कमी पैदा हुई।

हालांकि अमेरिका की ओर से लगाई गई शर्तों के बीच भारत ने रास्ता निकालने की कोशिश की थी, लेकिन अब युद्ध से उपजी जटिलता जैसे-जैसे लंबी खिंचती जा रही है, वैसे-वैसे विकल्प भी सिमटते जा रहे हैं। यह छिपा नहीं है कि डीजल के दाम में बढ़ोतरी के साथ ही माल ढुलाई की कीमत बढ़ती है और उसकी वजह से सभी जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं की महंगाई में बढ़ोतरी होती है। यानी फिलहाल डीजल के दाम तीन रुपए बढ़े हैं, लेकिन ईरान और अमेरिका के रुख के असर में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट के जो हालात बने हुए हैं, उसमें यह कहना मुश्किल है कि तेल के दाम में वृद्धि यहीं रुक जाएगी।

ऐसी स्थिति में अगर खाने-पीने से लेकर जरूरत की हर चीज की कीमतें बेलगाम हुईं, तो यह एक स्वाभाविक परिणति होगी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की वजह से उपजे ऊर्जा संकट में जरूरत इस बात की है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की उपलब्धता वाले देशों के साथ कूटनीतिक संवाद स्थापित करे और देश में गहराती मुश्किल को कम करने के लिए पहलकदमी करे।

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