डेस्क: दुनियाभर में एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। खासतौर पर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में तेजी से फैल रहे संक्रमण ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी वजह से इसे “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न” की श्रेणी में रखा गया है। इबोला को लेकर बढ़ती आशंका के बीच भारत भी अलर्ट मोड पर आ गया है। कर्नाटक सरकार ने निगरानी और स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। बेंगलुरु और मंगलुरु में विशेष आइसोलेशन सेंटर तैयार किए गए हैं ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

भारत में अभी नहीं मिला कोई इबोला मरीज

स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि फिलहाल भारत में इबोला संक्रमण का कोई पुष्टि किया गया मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और विदेशों से आने वाले यात्रियों को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। बेंगलुरु स्थित राजीव गांधी चेस्ट डिजीज इंस्टीट्यूट को आइसोलेशन सेंटर के तौर पर तैयार किया गया है। यहां कुछ संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इन सैंपलों को पहले एनआईवी बेंगलुरु भेजा जाएगा और बाद में पुष्टि के लिए एनआईवी पुणे में टेस्ट किया जाएगा।

क्या है इबोला वायरस?

इबोला एक बेहद गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है। यह वायरस इंसानों और जानवरों दोनों को संक्रमित कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बीमारी तेजी से फैल सकती है और अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की हालत बेहद गंभीर हो सकती है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल फीवर जैसे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह शरीर के कई अंगों को प्रभावित करने लगता है। गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग तक होने लगती है।

कैसे फैलता है इबोला संक्रमण?

इबोला वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति या जानवर के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, उल्टी, पेशाब या शरीर से निकलने वाले अन्य तरल पदार्थ संक्रमण फैला सकते हैं। इसके अलावा संक्रमित कपड़े, बिस्तर, मेडिकल उपकरण या सिरिंज जैसी चीजों को छूने से भी वायरस फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्यकर्मी और मरीज के करीबी लोग सबसे ज्यादा जोखिम में माने जाते हैं।

इबोला के लक्षण क्या हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, वायरस के संपर्क में आने के बाद 2 से 21 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में मरीज को तेज बुखार और कमजोरी महसूस होती है, लेकिन समय के साथ लक्षण गंभीर हो सकते हैं। इबोला के आम लक्षणों में तेज बुखार, अत्यधिक थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके अलावा उल्टी, दस्त, पेट दर्द, शरीर पर लाल चकत्ते और आंखों का लाल होना भी इसके संकेत हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में मरीज को शरीर के अंदर और बाहर ब्लीडिंग होने लगती है। सांस लेने में दिक्कत और लगातार कमजोरी भी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकती है।

किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, लगातार कमजोरी, उल्टी-दस्त या ब्लीडिंग जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इबोला जैसी बीमारी में समय पर जांच, इलाज और आइसोलेशन बहुत जरूरी होता है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

इबोला से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। हाथों को बार-बार साबुन से धोना बेहद जरूरी है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क और जरूरत पड़ने पर ग्लव्स का इस्तेमाल करें। अगर किसी संक्रमित व्यक्ति की देखभाल करनी हो तो पूरी सुरक्षा के साथ ही संपर्क करें। बिना सुरक्षा के शरीर के तरल पदार्थों या संक्रमित सामान को छूने से बचना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की क्या है सलाह?

स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञ लगातार लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि सही जानकारी, समय पर जांच और सावधानी से इबोला संक्रमण के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए स्वास्थ्य एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। 

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31