राजस्थान के कोटा में न्यू मेडिकल कॉलेज में पांच प्रूस्ताओं की डिलीवरी के बाद मौत के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. ब्लीडिंग रोकने के लिए जो ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन दिया जा रहा था, उसमे एक सैंपल सब स्टैंडर्ड पाया गया. इसके बाद ड्रग कंट्रोलर विभात ने तकाल कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज, जेके लोन अस्पताल और मेडिकल स्टोर्स से औद्योगिक क्षेत्र में भारी मात्रा में इंजेक्शन जब्त किये हैं.
जिन-जिन कंपिनयों का नाम इसमें आया है अब उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.इसके अलावा राज्य के सभी अस्पतालों से इस बैच के स्टॉक को हटाने के निर्देश दिए गए हैं. इस कार्रवाई से हडकंप मचा हुआ है.
खुलासे के बाद ड्रग विभाग एक्शन में
जांच के लिए कोलकाता भेजे गए 20 दवाओं के सैंपलों में से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का एक सैंपल अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) पाया गया है.इसके बाद ड्रग कंट्रोल विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज, जेके लोन अस्पताल, मेडिकल स्टोर्स और औद्योगिक क्षेत्र से बड़ी मात्रा में इंजेक्शन जब्त किए हैं.
ड्रग कंट्रोल विभाग के अनुसार अमृतसर की जैक्सन लैबोरेट्रीज द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन (बैच नंबर 1-7881) जांच में फेल हुआ है.यह इंजेक्शन स्थानीय फर्म मेसर्स राजस्थान मेडिकल के माध्यम से मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल को सप्लाई किए गए थे.मामले के सामने आते ही विभाग ने करीब 3500 इंजेक्शन जब्त कर लिए हैं, जबकि आशंका जताई जा रही है कि जांच से पहले लगभग 15 हजार इंजेक्शन उपयोग में लिए जा चुके हैं.
दोषी फार्म के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
मामले में अतिरिक्त ड्रग कंट्रोलर देवेंद्र गर्ग ने बताया कि इंजेक्शन का सैंपल अवमानक जरूर मिला है, लेकिन फिलहाल इस इंजेक्शन को प्रसूताओं की मौत का सीधा कारण नहीं माना जा रहा है.विभाग पूरे मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है और दोषी फर्म के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है.



















