बिहार के समस्तीपुर जिले की पुलिस ने अदालत में चल रहे एक मामले की नियमित जांच के दौरान एक 62 वर्षीय जीवित महिला को सरकारी कागजों पर मृत घोषित कर दिया। पुलिस की इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब वह बुजुर्ग महिला खुद पटना हाई कोर्ट के सामने हाजिर हो गई और गुहार लगाते हुए कहा कि वो अभी जिंदा और बिल्कुल स्वस्थ है। इस खुलासे के बाद पटना हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई और समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक को अदालत में बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना क्षेत्र का है। 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला सकली देवी का आपराधिक अपील का मामला पटना हाई कोर्ट में लंबित था। अदालत के आदेश के अनुसार अपीलों की स्थिति और याचिकाकर्ताओं की वर्तमान स्थिति जानने के लिए एक रूटीन इंक्वायरी का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश पर ताजपुर थाना के थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा ने बिना स्पॉट वेरिफिकेशन के अपने चैंबर में बैठकर एक रिपोर्ट तैयार कर दी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि याचिकाकर्ता सकली देवी की मृत्यु हो चुकी है। ताजपुर थाने की इस रिपोर्ट को समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक ने भी बिना जांचे-परखे आगे बढ़ा दिया और पत्र के माध्यम से हाई कोर्ट को बताया कि सकली देवी मर चुकी हैं। पुलिस की इस रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए 8 मई 2026 को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने क्रिमिनल अपील समाप्त कर दी, क्योंकि मुख्य याचिकाकर्ता सकली देवी की मृत्यु हो चुकी थी और किसी कानूनी वारिस ने केस जारी रखने की अर्जी नहीं दी थी।

महिला ने खोली पुलिस की पोल

जब सकली देवी को पता चला कि पुलिस ने उन्हें कागजों पर मार दिया गया है और उनका कोर्ट केस बंद हो गया है। तो वह तुरंत अपने वकील के माध्यम से पटना हाई कोर्ट पहुंचीं और केस को बहाल करने की याचिका दायर की। सकली देवी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि याचिकाकर्ता एक अनपढ़ महिला है। गलती से उसके आधार कार्ड और पैन कार्ड पर जन्मतिथि 01.01.1935 दर्ज हो गई है (जिस लिहाज से कागजों पर उनकी उम्र 90 साल से अधिक दिख रही थी)। जबकि 2018 में जारी उनके राशन कार्ड में उनकी वास्तविक उम्र 62 वर्ष दर्ज है। ताजपुर थानाध्यक्ष ने बिना किसी दस्तावेजी सबूत या मौके पर जाए, अपने चैंबर में बैठकर लापरवाही से उन्हें मृत घोषित करने की रिपोर्ट तैयार कर दी।

समस्तीपुर SP ने मांगी बिना शर्त माफी

अदालत के सामने जब वह महिला खुद पहुंच गई, तो हाई कोर्ट की खंडपीठ दंग रह गई। कोर्ट ने मामले में समस्तीपुर के एसपी और ताजपुर थानाध्यक्ष को तलब कर जवाब मांगा। इस फजीहत के बाद समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक ने हाई कोर्ट में कारण बताओ हलफनामा दायर कर बिना शर्त और बिना योग्यता के माफी मांगी। एसपी ने कोर्ट को बताया कि गलत रिपोर्ट भेजने के आरोप में ताजपुर के थानाध्यक्ष राकेश कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

कोर्ट ने दी चेतावनी, निलंबन हुआ रद्द

पुलिस की माफी स्वीकार करते हुए, हाई कोर्ट ने माना कि यह गलती असली लग रही थी, और यह भी कहा कि सरकारी दस्तावेजों खासकर आधार कार्ड में दर्ज उम्र में हेरफेर था। कोर्ट ने मानवीय आधार पर थानाध्यक्ष के निलंबन को रद्द करने का निर्देश दिया, लेकिन कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि थानाध्यक्ष भविष्य में ऐसी कोई भी रिपोर्ट सौंपते समय पूरी सावधानी बरतें।

भविष्य के लिए हाई कोर्ट ने जारी किया निर्देश

इस मामले के बाद अदालत में एक बड़ी व्यावहारिक समस्या भी सामने आई। राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस जब भी ऐसी रिपोर्ट तैयार करती है, तो अपील मेमो में केवल याचिकाकर्ता का नाम और पता होता है, माता-पिता या पति/पत्नी के बारे में खास जानकारी न होने की वजह से अक्सर भ्रम पैदा होता है, खासकर उन गांवों में जहां कई लोगों के नाम एक जैसे हो सकते हैं।

इस कमी को ठीक करने के लिए, हाई कोर्ट के जॉइंट रजिस्ट्रार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि भविष्य में जब भी किसी क्रिमिनल अपील में पुलिस से ऐसी कोई वेरिफिकेशन रिपोर्ट मांगी जाएगी तो याचिकाकर्ता का पूरा पता, पिता/पति का नाम और पूरी जानकारी पुलिस को भेजी जाएगी, ताकि यह पक्का हो सके कि ऐसी गंभीर लापरवाही दोबारा न हो। फिलहाल, कोर्ट ने सकली देवी के केस को फिर से शुरू कर दिया है।

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