कोलकाता: पश्चिम बंगाल चुनावों में करारी हार और विधायकों में विधायकों के बागी गुट बना लेने के बाद ममता बनर्जी अपने सियासी जीवन में सबसे मुश्किल वक्त से गुजर रही हैं। अटकलें लग रही है कि विधायकों की तरह ही सांसदों में भी बगावत हो सकती है। इसकी अटकलें कोलकाता से दिल्ली तक लग रही हैं। संभावना जताई रही है कि मानसूत्र सत्र से पहले खेला हो सकता है। इस सब के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ी चर्चा सामने आई है। इसमें कहा जा रहा है कि टीएमसी पार्टी को बचाने के लिए ममता बनर्जी खुद लोकसभा बनना चाहती हैं। वह बहरामपुर से चुनाव लड़ना चाहती हैं। अभी यहां से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान सांसद हैं। टीएमसी के पास 28 लोकसभा सांसद और 13 राज्यसभा एमपी हैं।
क्यों बहरामपुर से लड़ना चाहती हैं ममता?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी ने बहरामपुर से चुनाव लड़ने के लिए यूसुफ पठान से इस्तीफा देने को कहा, जिसे पूर्व क्रिकेटर ने खारिज कर दिया। बहरामपुर में 70 फीसदी मुसलमान वोटर हैं। इरफान पठान ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर 2024 के चुनाव में बड़ा उलटफेर किया था। यह चर्चा ऐसे वक्त पर सामने आई है जब लोकसभा में 23 सांसदों के टूट के अटकलों के बीच नई चर्चा छिड़ी है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ऐसा करके पार्टी को बड़ी टूट से बचाना चाहती हैं। एक तरफ ममता बनर्जी के मुस्लिम बहुल सीट से लड़ने की चर्चाएं हैं तो वहीं दूसरी ओर हुमायूं कबीर ने मुर्शीदाबाद की रेजीनगर सीट दीदी को ऑफर की है।
यूसुफ पठान सीट खाली करने को नहीं तैयार
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ममता बनर्जी भले ही बहरामपुर से लड़ना चाहती हैं लेकिन गुजरात के वडोदरा के रहने वाले यूसुफ पठान इसके लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने इस्तीफा देने की संभावना से इनकार कर दिया है। 2024 लोकसभा चुनावों में यूसुफ पठान ने ममता बनर्जी के बल पर ही बरहरामपुर से जीत हासिल की थी। तब उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता अधीर रंजन चौधरी को हराया था। बहरामपुर सीट 70 फीसदी मुस्लिम बहुल है। यूसुफ पठान को अधीर रंजन चौधरी के सामने 524,516 वोट मिले थे। वह 85 हजार वोटों से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।



















