मॉस्को। यूक्रेन ने रूस के यूराल इलाके में मौजूद ट्युमेन ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया। यह रिफाइनरी यूक्रेनी सीमा से लगभग 2,000 किलोमीटर (1,240 मील) दूर है। इस हमले के साथ ही रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ कीव का अभियान और आगे बढ़ गया है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन ने 3,000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक काम करने में सक्षम नए लंबी दूरी के ड्रोन विकसित किए हैं। ट्युमेन रिफाइनरी रूस के सबसे बड़े प्राइवेट ऑयल-प्रोसेसिंग प्लांट्स में से एक है। यह हर दिन लगभग 1,51,000 बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस कर सकती है और घरेलू बाजार में ईंधन की एक अहम सप्लायर है।

रूस में तेल की किल्लत, लगी लंबी कतारें

कई दक्षिणी रूसी क्षेत्र गैसोलीन की कमी का सामना कर रहे हैं। इस बात की पुष्टि अधिकारियों ने इस महीने की शुरुआत में की थी। इस सप्ताह राजधानी पर हुए हमले के कारण मस्कोवियों को गैसोलीन की बढ़ती कीमतों और ईंधन की कमी का सामना करना पड़ा।

पेट्रोल खरीद पर लगाई पाबंदी

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण पूरे रूस में ईंधन का संकट गहरा गया है। अब 53 इलाकों में पेट्रोल खरीदने पर पाबंदियां लगा दी गई हैं और वाहन चालकों को लंबी लाइनों और राशनिंग का सामना करना पड़ रहा है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों से रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया है। एजेंसी ने इस रुकावट को रूस-यूक्रेन संघर्ष के इतिहास में अभूतपूर्व बताया है।

एक हफ्ते में मॉस्को रिफाइनरी पर दो बार हमला

यूक्रेन ने 16 जून और फिर 18 जून को मॉस्को रिफाइनरी पर हमला किया। यह 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले की शुरुआत के बाद से रूसी राजधानी पर हुआ सबसे बड़ा हमला हो सकता है।

रॉयटर्स के अनुसार, इंडस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि 18 जून को हुए हमले से ‘यूरो+’ क्रूड ऑयल प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स को नुकसान पहुंचा। इसे 2020 में रिफाइनरी के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया था। इस यूनिट में क्रूड डिस्टिलेशन सेक्शन शामिल है, जिसकी क्षमता लगभग 140,000 बैरल प्रति दिन है। यह रिफाइनरी की कुल प्रोसेसिंग क्षमता का लगभग 47% है।

इससे पहले 16 जून को हुए एक हमले में एक और बड़ी क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट को नुकसान पहुंचा था, जो रिफाइनरी की प्रोसेसिंग क्षमता का लगभग 53% संभालती थी।

रूस ने तेल खरीद पर लगाई पाबंदी

स्वतंत्र रूसी आउटलेट ‘द बेल’ के अनुसार, ईंधन की खरीद पर पाबंदियां रूस और कब्जे वाले इलाकों के 53 क्षेत्रों तक फैल गई हैं। जमाखोरी रोकने के लिए ड्राइवरों को अक्सर एक बार में सिर्फ एक टैंक के बराबर ईंधन ही खरीदने की इजाजत दी जाती है।

18 इलाकों में गाड़ी चलाने वाले हर ग्राहक के लिए ज्यादा से ज्यादा 50 लीटर या एक फुल टैंक पेट्रोल ही खरीद सकते हैं। तेल बनाने वाली कंपनी ‘टाटनेफ्ट’ ने अपने सैकड़ों स्टेशनों पर देश भर में सीमाएं तय कर दी हैं। मॉस्को के दक्षिण में एक जगह पर तो बिक्री को प्रति कार 20 लीटर पेट्रोल तक सीमित कर दिया गया है।

क्रीमिया में हालात खास तौर पर गंभीर हैं। यूक्रेनी सेना ने उस इलाके में ईंधन ले जाने वाले टैंकरों और ट्रकों पर हमले किए हैं, जिसकी वजह से मई के आखिर से ही ईंधन की राशनिंग (सीमित आपूर्ति) शुरू हो गई है। गाड़ी चलाने वालों ने बताया है कि उन्हें पेट्रोल भरवाने के लिए तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा है।

स्थानीय अधिकारियों ने क्यूआर कोड वाला राशनिंग सिस्टम लागू किया है। ड्राइवरों को अपना तय ईंधन कोटा पाने के लिए यह कोड दिखाना जरूरी है। इन हमलों की वजह से कई प्लांट पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद हो गए हैं, जिससे रूस की मुख्य रिफाइनिंग क्षमता का 20 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अस्थायी रूप से ठप हो गया है।

जेट फ्यूल के एक्सपोर्ट पर भी लगाई रोक

रूसी सरकार ने जेट फ्यूल के एक्सपोर्ट पर भी रोक लगा दी है और उन नियमों की समय-सीमा बढ़ा दी है जिनके तहत रिफाइनरियां देश में बना ऐसा ईंधन बेच सकती हैं जो यूरो-5 क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को पूरा नहीं करता।

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