नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के बापटला जिसे में एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है. वहां 94 साल की एक महिला ने सरकार से भारतीय नागरिकता वापस देने की अपील की है. उनका कहना है कि वो भारतीय के रूप में ही मरना चाहती हैं. इस महिला के बच्चे अमेरिका में रहते हैं. वो 2000 में अपने बच्चों के पास अमेरिका चली गई थीं. उन्होंने अमेरिकी नागरिकता भी ले ली थी. वह 2018 में भारत वापस आकर अपने गांव में रहने लगी थीं. अब वो अमेरिकी नागरिकता छोड़कर भारतीय नागरिकता लेना चाहती हैं. इसके लिए उन्होंने आवेदन किया है. उनकी अपील पर बापटला जिले के कलेक्टर ने सुनवाई की.

कहां का है यह मामला
इस महिला का नाम कोंड्रागुंटा महालक्ष्मम्मा है. उन्होंने सरकार से भारतीय नागरिकता वापस देने की अपील की है. उनका कहना है कि वह अपने जीवन के अंतिम दिन अपने गांव में बिताना चाहती हैं और एक भारतीय के रूप में मरना चाहती हैं. इस मामले की सुनवाई मंगलवार को बापटला के जिला कलेक्टर डॉक्टर वी विनोद कुमार ने अपने दफ्तर में की.
अधिकारियों के मुताबिक महालक्ष्मम्मा मूल रूप से चिनागंजम मंडल के चिंथागुम्पाला गांव की रहने वाली हैं. पति नागभूषणम के निधन के बाद वह अपने बेटे डॉक्टर के बुच्चैया चौधरी के पास अमेरिका चली गई थीं. चौधरी के मशहूर कैंसर सर्जन हैं.महालक्ष्मम्मा ने जुलाई 2000 में अमेरिकी नागरिकता ले ली थी. करीब दो दशक अमेरिका में रहने के बाद वह 2018 में भारत लौट आईं थी. उसके बाद से ही वह अपने पैतृक गांव में रह रही हैं.
भारत आने के बाद उन्होंने स्वेच्छा से अपनी अमेरिकी नागरिकता छोड़ने का फैसला किया. उन्होंने भारतीय नागरिकता दोबारा हासिल करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था.
भारतीय संविधान के प्रति ली शपथ
उनके आवेदन पर मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान महालक्ष्मम्मा को भारतीय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ तेलुगु भाषा में दिलाई गई. उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें शपथ का पाठ तेलुगु में दिया गया था. उनके बेटे ने उसे पढ़ने में उनकी मदद की. इसके बाद उन्होंने कागजात पर दस्तखत कर कानूनी प्रक्रिया पूरी की.
कलेक्टर डॉक्टर कुमार के मुताबिक महालक्ष्मम्मा के पास ओसीआई (OCI) कार्ड और अमेरिकी नागरिकता थी. उन्हें लगा कि अब जीवन का अंतिम समय करीब है, इसलिए उन्होंने भारतीय नागरिक के रूप में अपने अंतिम दिन बिताने और इसी रूप में दुनिया से विदा लेने की इच्छा जताई.उन्होंने बताया कि महालक्ष्मम्मा 23 जून को अपने बेटे के साथ मेरे पास आई थीं. उन्होंने बताया कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी हो गई हैं. उनका आवेदन और रिपोर्ट गृह मंत्रालय को अंतिम मंजूरी के लिए भेज दी गई है.
सुनवाई के दौरान महालक्ष्मम्मा ने अधिकारियों से कहा कि वह अपना बाकी का जीवन अपनी मातृभूमि में बिताना चाहती हैं और चाहती हैं कि उनका अंतिम संस्कार भी भारत में ही हो.



















