देश में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच बुधवार को नायरा एनर्जी ने लोगों को थोड़ी राहत दी है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये की कमी की है। लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल अपने दामों में कोई कमी नहीं की है। हालांकि नायरा एनर्जी द्वारा तेल की कीमतों में कमी के बाद सरकारी तेल कंपनियों पर भी प्रेशर आ गया है।

पेट्रोल पर 5-6 रुपये प्रति लीटर कमा रही तेल कंपनियां

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) इस समय पेट्रोल पर 5 से 6 रुपये प्रति लीटर का मार्केटिंग मार्जिन कमा रही है। इस मार्जिन का नायरा एनर्जी ने लोगों को फायदा दे दिया है। लेकिन अभी तक सरकारी तेल कंपनियों की ओर से पेट्रोल की कीमतों में कमी को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। 

डीजल पर हो रहा नुकसान

सरकारी तेल कंपनियों को भले ही पेट्रोल पर 5 से 6 रुपये का लाभ हो रहा हो, लेकिन डीजल पर अभी भी 8 से 10 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। 

क्या सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम करेगी कम

भले ही नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दामों में कमी कर दी हो, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों से लोगों को कीमतों में राहत मिलने की संभावना कम लग रही है। कंपनियां पहले अपने पुराने घाटे की भरपाई करना चाहती हैं, वहीं सरकार भी उपभोक्ताओं को राहत देने में हुए राजकोषीय खर्च की कुछ भरपाई करना चाह सकती है।

कैसे बढ़ीं और फिर घटीं कच्चे तेल की कीमतें?

भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। 27 फरवरी को भारतीय तेल बास्केट की कीमत 71.17 डॉलर प्रति बैरल थी, जो कि मार्च महीने की शुरुआत यह 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। मई तक यह कीमतें 100 डॉलर से ऊपर बनी रहीं। वहीं जून के मध्य तक यह 80 डॉलर से नीचे आ गई। 

बता दें कि अमेरिका और ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज बंद हो गया था, जिससे दुनिया भर में तेल आपूर्ति प्रभावित हो गई थी। इसके बाद तेल की कीमतों में तेजी से उछाल देखने को मिली। वहीं अब दोनों देशों के बीच शांति समझौते की संभावना बनने और एमओयू पर साइन के बाद होर्मुज खोल दिया गया। जिससे तेल की आपूर्ति सामान्य होने लगी, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई। 

सरकार पर पड़ा 1.23 लाख करोड़ रुपये का बोझ

दरअसल, बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। उस समय तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 26 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। डीजल पर 81.90 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा था। इसके बाद 15 मई से 25 मई के बीच कंपनियों ने पेट्रोल के दाम 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 7.53 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार पर अब तक करीब 1.23 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजकोषीय बोझ पड़ा है। केवल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से सरकार को हर महीने लगभग 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।

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