Ethanol: दुनियाभर में प्रदूषण कम करने के लिए नए-नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं. अब एविएशन फील्ड में भी बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. दक्षिण कोरिया ने एथेनॉल बेस्ड सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी SAF को बढ़ावा देने का फैसला किया है. इसका मकसद पुराने जेट फ्यूल पर निर्भरता कम करके हवा में कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसों का घुलने से रोकना है. 

क्या है सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल?
सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, पुराने पेट्रोलियम बेस्ड जेट फ्यूल से ज्यादा इको फ्रेंडली माना जाता है. इसे एथेनॉल, कृषि अवशेष, इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल और दूसरे ऑर्गेनिक सोर्स से तैयार किया जा सकता है. इस फ्यूल का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे विमान उड़ाने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड कम निकलता है.

दक्षिण कोरिया ने क्या फैसला लिया?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण कोरिया सरकार ने विमानन क्षेत्र में SAF के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए नया तरीका अपनाया है. अब एथेनॉल बेस्ड ईंधन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार चाहती है कि आने वाले साल में एयरलाइंस धीरे-धीरे पुराने जेट फ्यूल की जगह ज्यादा ईको- फ्रेंडली ईंधन का इस्तेमाल करें. 

भारत और बायोफ्यूल कनेक्शन
भारत भी लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम पर तेजी से काम कर रहा है. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर देश आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा भारत में भी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल पर रिसर्च और विकास का काम चल रहा है. 

क्या जल्द पूरी तरह बदल जाएगा जेट फ्यूल?
फिलहाल पारंपरिक जेट फ्यूल को पूरी तरह बदलना आसान नहीं है. विमान इंजन, ईंधन सप्लाई और उत्पादन क्षमता जैसी कई चुनौतियां अभी मौजूद हैं. इसलिए आने वाले समय में सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल को पुराने जेट फ्यूल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किए जाने की संभावना अधिक है. 

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