दुनिया की रैंकिंग में टॉप पर विराजमान, लगातार 2 टी20 वर्ल्ड कप जीत कर आ रही टीम अचानक लगातार 6 हार का रिकॉर्ड बना दे. क्या इस बात पर विश्वास किया जा सकता है? भारतीय टीम के साथ यही हुआ है, जो यूके टूर पर अब तक एक भी टी20 मैच नहीं जीत पाई है. कप्तान श्रेयस अय्यर आलोचकों के निशाने पर हैं, जो ऐसे पहले भारतीय कप्तान बने हैं, जो अपने कप्तानी करियर के पहले 7 मैचों में एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाए.
आमतौर पर प्लेइंग इलेवन तैयार करने में कप्तान और कोच भी बड़ा रोल अदा करता है. इसलिए इस शर्मसार कर देने वाले प्रदर्शन के लिए केवल उन 11 खिलाड़ियों को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं जो खेलने मैदान पर उतरे थे. क्योंकि रणनीति कोचिंग स्टाफ की तैयार करता है. ऐसे में कोच गौतम गंभीर को भी निशाने पर लिया जाना चाहिए. यहां जान लीजिए कौन है टीम इंडिया की 6 हार का असली गुनाहगार.
श्रेयस अय्यर की खराब कप्तानी
बतौर बल्लेबाज श्रेयस अय्यर का प्रदर्शन ठीकठाक रहा, जिन्होंने सीरीज में 218 रन बनाए. मगर गेंदबाजों के इस्तेमाल की बात की जाए, तो अय्यर बुरी तरह मात खा गए. खासतौर पर आखिरी 2 मैचों में कप्तान अय्यर इंग्लैंड के बल्लेबाजों को बड़ी पार्टनरशिप करने से नहीं रोक पाए. चौथे टी20 में जोस बटलर के जल्दी आउट होने के बाद फिल साल्ट और हैरी ब्रूक अंत तक डटे रहे और मैच अपने पाले में ले गए. यही काम पांचवें टी20 में जोस बटलर और हैरी ब्रूक ने किया.
बड़ी पार्टनरशिप के दौरान कप्तान अय्यर अपने स्ट्राइक बॉलर को नहीं लाए. उन्होंने ऐसा किया भी तो दूसरे छोर पर हल्का गेंदबाज लगा दिया गया. फील्डिंग में कैच तो छूटे ही, वहीं फील्डिंग सेट करने में अटैकिंग स्ट्रेटेजी दिखी ही नहीं.
लगातार बदलती रही प्लेइंग इलेवन
कोच गौतम गंभीर भी गलतियां करने में पीछे नहीं रहे. उनकी मंशा समझ में आती है कि वो 2028 टी20 वर्ल्ड कप के लिए एक नई और युवा टीम बनाना चाहते हैं. मगर जब लगभग पूरा कोचिंग स्टाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहा था कि टीम मैनेजमेंट का अपने खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाना जरूरी है, उसके बाद संजू सैमसन को ड्रॉप कर दिया गया. उनकी जगह वैभव सूर्यवंशी आए, जो 3 पारियों में केवल 42 रन बना सके. जब वैभव नहीं चले, तो उन्हें भी ड्रॉप कर दिया गया. सैमसन कई तरह का अनुभव ले चुके हैं, लेकिन इस तथ्य को भुला दिया गया कि खराब प्रदर्शन के चलते ड्रॉप होने पर 15 साल के वैभव सूर्यवंशी के ऊपर इसका क्या नकारात्मक मानसिक दबाव आएगा.
वाशिंगटन सुंदर भी टीम से अंदर-बाहर होते रहे. मैदान पर कप्तान किन गेंदबाजों का इस्तेमाल करेगा, इसमें भी कोचिंग स्टाफ की रणनीति सम्मिलित होती है. ऐसे में शिवम दुबे को आखिरी तीन मैचों में सिर्फ एक-एक ओवर मिला, जबकि पांचवें मैच में उनके बजाय सूर्यांश शेडगे को गेंदबाजी थमाई गई, नतीजन वो बहुत महंगे साबित हुए.



















