urya Budh Ketu Mahayuti 2026 Rashifal: बुध ग्रह 22 अगस्त को सिंह राशि में गोचर कर चुके हैं, जहां पहले से ही ग्रहों के राजा सूर्यदेव और छाया ग्रह केतु विराजमान हैं. इस तरह सिंह राशि में बुध, सूर्य और केतु की महायुति बन रही है. वैदिक ज्योतिष में सूर्य, बुध और केतु की युति को एक विशिष्ट और गूढ़ संयोजन बताया गया है, जो एक अस्थिर लेकिन खतरनाक करियर का माहौल बना सकता है. बुध वाणी, तर्क, ईमेल, व्यापार, बैठकों आदि को नियंत्रित करते हैं तो सूर्य अधिकार, नेतृत्व, अभिमान, आत्मविश्वास के कारक ग्रह हैं. वहीं केतु अलगाव, भ्रम, अचानक कटौती, छिपे हुए अंतराल के कारक ग्रह हैं. जब ये तीनों ग्रह एक साथ आते हैं, तब मानसिक ऊर्जा बहार की बजाय अंदर की तरफ मुड़ जाती है. हालांकि तीनों ग्रहों की यह युति 7 सितंबर तक रहेगी, इसके बाद बुध ग्रह कन्या राशि में प्रवेश कर जाएंगे, इसके बाद यह महायुति बिखर जाएगी. यानी 16 दिन तक इस महायुति की वजह से सिंह, कुंभ समेत 6 राशियों के जीवन में कई नाटकीय बदलाव देखने को मिलेंगे.

सिंह राशि में सूर्य-केतु-बुध की महायुति
सिंह राशि में इन तीनों ऊर्जाओं के मिलने से आपके करियर के बारे में चुनाव नाटकीय हो सकते हैं. लोग बहुत बड़ी बातें कर सकते हैं, बहुत जल्दी इस्तीफा दे सकते हैं, आधे तथ्यों पर भरोसा कर सकते हैं, या लागत का पूरी तरह से आकलन किए बिना एक साहसिक कदम उठा सकते हैं. यह गोचर आत्म-समीक्षा के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन अहंकार-प्रेरित कार्रवाई के लिए जोखिम भरा हो सकता है. कुछ राशियों को करियर के कदम उठाने, परिवार और वैवाहिक जीवन में भूमिकाएं, धन संबंधित कई मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए. आइए जानते हैं बुध गोचर से सिंह राशि में बनी सूर्य, केतु और बुध की महायुति से किन-किन राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति बन सकती है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का वृषभ राशि पर प्रभाव
बुध, सूर्य, केतु की युति के प्रभाव से वृषभ राशि वालों को ऑफिस में आराम, संपत्ति, कार्यालय की व्यवस्था, पारिवारिक बिजनेस या भावनात्मक सुरक्षा के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता हो सकती है. इस अवधि में किसी वजह से घर पर दबाव बढ़ सकता है और वे करियर का चुनाव करने के लिए दबाव महसूस कर सकते हैं. केतु की वजह से वृष राशि वालों को नौकरी में बदलाव लुभा सकता है, लेकिन विवरण छिपे हो सकते हैं. साथ ही इस अवधि में लव लाइफ में गलतफहमी बढ़ सकती हैं, जिसका रिलेशनशिप पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का मिथुन राशि पर प्रभाव
बुध मिथुन राशि का स्वामी ग्रह है, इसलिए संचार महत्वपूर्ण है. इस अवधि में ईमेल, इंटरव्यू, कॉन्ट्रैक्ट, बिक्री कॉल, लेखन, प्रस्तुतियां और यात्रा योजनाओं पर कुछ अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है. केतु की वजह से एक लापरवाह संदेश गलतफहमी का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से एक महत्वपूर्ण विवरण से चूक सकते हैं. करियर और नौकरी में अचानक बदलाव या काम का दबाव बढ़ सकता है और अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका रहेगी. साथ ही आपको आर्थिक मामलों में बिना सोचे निवेश करने से नुकसान हो सकता है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का सिंह राशि पर प्रभाव
बुध का गोचर आपकी ही राशि के लग्न भाव में हो रहा है, जहां पहले से ही सूर्य और केतु विराजमान हैं. सिंह राशि में, यह गोचर बहुत मजबूती से महसूस किया जा सकता है, क्योंकि ग्रहों की ऊर्जा उनके अपने ही राशि में सक्रिय है. इस महायुति के प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ सकता है, लेकिन धैर्य कम हो सकता है. इस अवधि में एक कठोर जवाब, सार्वजनिक बहस, अचानक इस्तीफा या ओवर कॉन्फिडेंस वाला वादा परेशानी का कारण बन सकता है. सिंह राशि वालों को इस अवधि में किसी भी मामले में तिल का ताड़ नहीं बनाना चाहिए और अभिमान की लड़ाई में नहीं बदलना चाहिए.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का कन्या राशि पर प्रभाव
बुध, सूर्य और केतु की महायुति के प्रभाव से कन्या राशि वाले छिपे हुए काम के तनाव, निजी चिंता, ऑफिस पॉलिटिक्स या स्वास्थ्य संबंधी करियर के दबाव का सामना करना पड़ सकता है. इस अवधि में कन्या राशि वाले किसी भी समस्या पर बहुत अधिक सोच सकते हैं और डर के मारे निर्णय ले सकते हैं. हालांकि कार्य करने से पहले तथ्यों की जांच करने से आपको एक महंगी करियर संबंधी गलती से बचने में मदद मिल सकती है. इस अवधि में परिवार में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ सकता है और दोस्तों के साथ किसी बात पर बहसबाजी होने की आशंका बन रही है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का वृश्चिक राशि पर प्रभाव
बुध, सूर्य और केतु की महायुति के प्रभाव से वृश्चिक राशि वालों को करियर का दबाव सीधे तौर पर अनुभव हो सकता है. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों को अधिकारियों और साथ काम करने वालों के साथ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और नौकरी में बदलाव करने की प्लानिंग भी कर सकते हैं. वे नियंत्रण करना चाह सकते हैं, लेकिन केतु वास्तविक तस्वीर को धूमिल कर सकता है. अचानक से ऑफिस का छिपा हुआ मामला सामने आ सकता है, जिसकी वजह से काफी समय तक डर का सामना करना पड़ सकता है. एक मजबूत प्रतिक्रिया प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए शांत रहने में भलाई है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का कुंभ राशि पर प्रभाव
सूर्य, केतु और बुध ग्रह की महायुति के प्रभाव से कुंभ राशि वालों को पार्टनरशिप, ग्राहक, कॉन्ट्रैक्ट और प्रफेशनल समझौतों के माध्यम से दबाव का सामना करना पड़ सकता है. कहीं से भी आकर अचानक कोई कुछ ऐसा कह सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन या संदेह पैदा हो. करियर में भ्रम और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों को अधिकारियों से विवाद से बचना होगा. दांपत्य और प्रेम जीवन में अहंकार या गलतफहमी बढ़ सकती है और स्वास्थ्य में तनाव और थकान परेशान कर सकती है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का मिथुन राशि पर प्रभाव
बुध मिथुन राशि का स्वामी ग्रह है, इसलिए संचार महत्वपूर्ण है. इस अवधि में ईमेल, इंटरव्यू, कॉन्ट्रैक्ट, बिक्री कॉल, लेखन, प्रस्तुतियां और यात्रा योजनाओं पर कुछ अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है. केतु की वजह से एक लापरवाह संदेश गलतफहमी का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से एक महत्वपूर्ण विवरण से चूक सकते हैं. करियर और नौकरी में अचानक बदलाव या काम का दबाव बढ़ सकता है और अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका रहेगी. साथ ही आपको आर्थिक मामलों में बिना सोचे निवेश करने से नुकसान हो सकता है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का मिथुन राशि पर प्रभाव
बुध मिथुन राशि का स्वामी ग्रह है, इसलिए संचार महत्वपूर्ण है. इस अवधि में ईमेल, इंटरव्यू, कॉन्ट्रैक्ट, बिक्री कॉल, लेखन, प्रस्तुतियां और यात्रा योजनाओं पर कुछ अतिरिक्त ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है. केतु की वजह से एक लापरवाह संदेश गलतफहमी का कारण बन सकता है, जिसकी वजह से एक महत्वपूर्ण विवरण से चूक सकते हैं. करियर और नौकरी में अचानक बदलाव या काम का दबाव बढ़ सकता है और अधिकारियों से मतभेद होने की आशंका रहेगी. साथ ही आपको आर्थिक मामलों में बिना सोचे निवेश करने से नुकसान हो सकता है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का सिंह राशि पर प्रभाव
बुध का गोचर आपकी ही राशि के लग्न भाव में हो रहा है, जहां पहले से ही सूर्य और केतु विराजमान हैं. सिंह राशि में, यह गोचर बहुत मजबूती से महसूस किया जा सकता है, क्योंकि ग्रहों की ऊर्जा उनके अपने ही राशि में सक्रिय है. इस महायुति के प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ सकता है, लेकिन धैर्य कम हो सकता है. इस अवधि में एक कठोर जवाब, सार्वजनिक बहस, अचानक इस्तीफा या ओवर कॉन्फिडेंस वाला वादा परेशानी का कारण बन सकता है. सिंह राशि वालों को इस अवधि में किसी भी मामले में तिल का ताड़ नहीं बनाना चाहिए और अभिमान की लड़ाई में नहीं बदलना चाहिए.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का कन्या राशि पर प्रभाव
बुध, सूर्य और केतु की महायुति के प्रभाव से कन्या राशि वाले छिपे हुए काम के तनाव, निजी चिंता, ऑफिस पॉलिटिक्स या स्वास्थ्य संबंधी करियर के दबाव का सामना करना पड़ सकता है. इस अवधि में कन्या राशि वाले किसी भी समस्या पर बहुत अधिक सोच सकते हैं और डर के मारे निर्णय ले सकते हैं. हालांकि कार्य करने से पहले तथ्यों की जांच करने से आपको एक महंगी करियर संबंधी गलती से बचने में मदद मिल सकती है. इस अवधि में परिवार में किसी बात को लेकर तनाव बढ़ सकता है और दोस्तों के साथ किसी बात पर बहसबाजी होने की आशंका बन रही है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का वृश्चिक राशि पर प्रभाव
बुध, सूर्य और केतु की महायुति के प्रभाव से वृश्चिक राशि वालों को करियर का दबाव सीधे तौर पर अनुभव हो सकता है. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों को अधिकारियों और साथ काम करने वालों के साथ परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और नौकरी में बदलाव करने की प्लानिंग भी कर सकते हैं. वे नियंत्रण करना चाह सकते हैं, लेकिन केतु वास्तविक तस्वीर को धूमिल कर सकता है. अचानक से ऑफिस का छिपा हुआ मामला सामने आ सकता है, जिसकी वजह से काफी समय तक डर का सामना करना पड़ सकता है. एक मजबूत प्रतिक्रिया प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए शांत रहने में भलाई है.

सूर्य-केतु-बुध की महायुति का कुंभ राशि पर प्रभाव
सूर्य, केतु और बुध ग्रह की महायुति के प्रभाव से कुंभ राशि वालों को पार्टनरशिप, ग्राहक, कॉन्ट्रैक्ट और प्रफेशनल समझौतों के माध्यम से दबाव का सामना करना पड़ सकता है. कहीं से भी आकर अचानक कोई कुछ ऐसा कह सकता है, जिससे चिड़चिड़ापन या संदेह पैदा हो. करियर में भ्रम और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है. इस राशि के नौकरी पेशा जातकों को अधिकारियों से विवाद से बचना होगा. दांपत्य और प्रेम जीवन में अहंकार या गलतफहमी बढ़ सकती है और स्वास्थ्य में तनाव और थकान परेशान कर सकती है.

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