Sukhbir Singh Badal Attack: सुखबीर सिंह बादल आखिर महाराष्ट्र क्यों गए थे? मराठों के गढ़ में सिखों के लिए ऐसी कौन सी जगह है, जो उनके लिए प्राणों से भी प्यारी है. वे इसे ईश्वर का स्थान क्यों मानते हैं और यहां का गुरु गोबिंद सिंह के साथ क्या संबंध है?
Takht Sachkhand Sri Hazur Sahib Nanded: शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर महाराष्ट्र के नांदेड़ में जानलेवा हमला हुआ है. उनका इलाज चल रहा है. अहम सवाल ये है कि वह आखिर महाराष्ट्र क्यों गए थे? मराठों के गढ़ में सिखों के लिए ऐसी कौन सी जगह है, जो उनके लिए प्राणों से भी प्यारी है. वे इसे ईश्वर का स्थान क्यों मानते हैं और यहां का गुरु गोबिंद सिंह के साथ क्या संबंध है?
सुखबीर सिंह बादल पर हमला महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुआ. वह यहां गोदावरी नदी के तट पर स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब में परिवार के साथ आए थे. इसको सिख धर्म के पांच सबसे पवित्र और सर्वोच्च तख्तों में से एक माना जाता है. यह पवित्र जगह सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के जीवन और उनके अंतिम समय से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है.
क्या है तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब?
सचखंड के शाब्दिक मतलब पर बात करें तो इसका मतलब ‘सत्य का खंड’ या फिर ईश्वर का निवास स्थान होता है. यह वही ऐतिहासिक स्थल है जहां साल 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन को पूरा किया था और ज्योति ज्योत में समा गए यानी दिव्य प्रकाश में ब्रह्मलीन हो गए जैसा कि सिखों में गुरुओं के प्रति मान्यता है. यहां पर भव्य गुरुद्वारे का निर्माण पंजाब के महान शासक महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था. इसको 19वीं सदी में 1832 से 1837 के बीच तैयार किया गया था.
सिखों के दसवें और आखिरी गुरु गोबिंद सिंह सन 1708 में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आए थे और फिर अंतिम सांस तक यहां पर ही रहे. उन्होंने जीवन के अंतिम दिनों को यहां स्थायी निवास बना लिया था. नांदेड़ की इसी पवित्र भूमि पर गुरु गोबिंद सिंह ने सिख पंथ को यह ऐतिहासिक आदेश दिया था कि उनके बाद कोई भी जीवित गुरु नहीं होगा. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब ही सिखों के सदा के लिए आजीवन गुरु रहेंगे.
नांदेड़ के इस तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब गुरुद्वारे के गुरुद्वारे का मुख्य कक्ष ‘अंगीठा साहिब’ कहलाता है. यह ठीक उसी जगह पर बनाया गया है, जहां 1708 में गुरु गोबिंद सिंह जी का अंतिम संस्कार हुआ था. दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी के शस्त्र और पवित्र निशान यहां पर है.
इस तख्त पर उनके कई अमूल्य और ऐतिहासिक अवशेष आज भी पूरी श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखे गए हैं. इनमें उनकी तलवारें, तीर-कमान, ढाल और अन्य व्यक्तिगत वस्तुएं शामिल हैं, जिनके दर्शन करने देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
नांदेड़ की यह ऐतिहासिक धरती आज भी सिख धर्म के अनुयायियों के लिए प्राणों से अधिक प्यारी है. यहां पर गुरु गोबिंद सिंह की मुलाकात माधव दास बैरागी से हुई थी, जिन्हें उन्होंने अमृत छकाकर बांदा सिंह बहादुर के रूप में नया नाम दिया और पंजाब में जुल्म के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा था.
सुखबीर बादल पर किसने किया हमला?
ऐसा बताया जा रहा है कि सुखबीर सिंह बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब आए. यहां पर गुरुद्वारे के पास एक निहंग ने हमला किया. फिलहाल हमलावर की पहचान और ऐसा करने की वजह सामने नहीं आ सकी है. यह हमला सुबह 11: 30 बजे के करीब धारदार हथियार से किया, जिससे उनके हाथ में गंभीर चोट आई है. इस हमले में सुखबीर की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी भी घायल है.



















