हिन्दू धर्म में हर तिथि हर व्रत का अलग-अलग महत्व है. साल में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है. एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में धार्मिक मान्यता है कि एकादशी तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा करने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही सभी मन्नते पूरी होती हैं. इस दिन किया गया व्रत अनेक फल की प्रप्ति कराता है. लेकिन सावन मास की अंतिम एकादशी का विशेष महत्व शास्त्रों मे बताया गया है. आइए उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से पुत्रदा एकादशी के बारे में विस्तार से जानते हैं.
श्रावण की अंतिम एकादशी कब?
वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 2 बजे से होगा और तिथि का समापन 24 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर होगा.उदया तिथि के अनुसार 23 अगस्त 2026, रविवार को ही सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. वही अगर पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करे तो 23 अगस्त को सुबह 07 बजकर 23 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा.
कैसे हुईं इस व्रत की शुरुआत
पंडित आनंद भारद्वाज ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार महिष्मति राज्य के राजा महीजित को कोई संतान नहीं थी. वे बड़े ही पुण्य का काम करते थे. संतान न होने से नाराज राजा ने अपनी प्रजा और ब्राह्मणों की एक बैठक बुलाई. ब्राह्मण और प्रजा दोनों ने इस समस्या से निजात के लिए तप शुरू किया. इस दौरान उन्हें लोमस ऋषि मिले. जिन्होंने इस समस्या के लिए सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत रखने की बात कही. जिसके बाद राजा, प्रजा और ब्राह्मणों ने इस व्रत को रखा. जिसके प्रभाव से राजा महीजित को संतान की प्राप्ति हुई.
कैसे रखें व्रत
– एकादशी व्रत के दिन अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए.
एकादशी का व्रत नहीं रखने वालों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए.
– एकादशी व्रत के दिन बाल, नाखून, और दाढ़ी कटवाने की भूल न करें.
– एकादशी व्रत के दिन ब्राह्मणों को कुछ दान अवश्य करना चाहिए.
– एकादशी व्रत के पारण करने के बाद अन्न का दान करना शुभ माना गया है.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।



















