गांधीनगर : गुजरात में लगातार चुनावी हार के बाद गुजरात कांग्रेस अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति बदलने जा रही है। कांग्रे इस बार चुनाव से पहले ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) मूवमेंट का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के एक बड़े नेता ने इकनॉमिक टाइम्स को अनौपचारिक रूप से बताया कि पार्टी अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में बड़ी संख्या में युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतार सकती है। नेता ने कहा कि आज की राजनीतिक चर्चा में युवा एक अहम भूमिका निभाते हैं।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि पार्टी अगले साल के चुनाव के लिए नए युवा चेहरों को उतारने पर विचार कर रही है। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा और गुजरात कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने पिछले हफ्ते दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात की थी।
गुजरात कांग्रेस में क्या विवाद
बताया जा रहा है कि दिल्ली में हाई कमान से मुलाकात में पता चला है कि पार्टी आखिरकार अपनी राज्य इकाई के संगठनात्मक ढांचे की घोषणा करने पर विचार कर रही है। शक्तिसिंह गोहिल के इस्तीफे के बाद अमित चावड़ा को दूसरी बार राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से पिछले एक साल में यह मामला सुलझ नहीं पाया था।
कांग्रेस ने 2017 में किया था अच्छा प्रदर्शन
यहां यह बताना जरूरी है कि 2017 में पाटीदार आंदोलन के दौरान गुजरात कांग्रेस ने अब तक का अपना सबसे अच्छा चुनावी प्रदर्शन किया था। तब कांग्रेस ने गुजरात में 77 सीटें जीती थीं। तब पार्टी ने युवा पाटीदार नेताओं के साथ-साथ अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी जैसे अन्य युवा आंदोलनकारियों को भी मैदान में उतारा था।
Gen Z पर दांव लगाने को तैयार गुजरात कांग्रेस
वहीं, पांच साल बाद 2022 के गुजरात चुनाव में पार्टी की सीटों की संख्या घटकर 17 रह गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर था। युवा नेता हार्दिक पटेल व अल्पेश ठाकोर बीजेपी में शामिल हो गए थे। अब इस बार चुनाव में कांग्रेस फिर Gen Z पर दांव लगाने के लिए तैयार है।
कांग्रेस का छात्र संगठन एक्टिव
NSUI छात्रों से जुड़े मुद्दों- जैसे एडमिशन, परीक्षा, पेपर लीक, नतीजे, फीस और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यापक मसलों-पर कई कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी कर रहे हैं। NSUI ‘छात्र की गूंज’ के ज़रिए ‘जेन-Z’ से जुड़ने और खुद को छात्रों की आवाज उठाने वाले मंच के तौर पर पेश करने की योजना बना रही है। गुजरात यूनिवर्सिटी, GCAS और परीक्षा के पेपर लीक जैसे मामलों पर कांग्रेस का छात्र संगठन एक्टिव हो गया है। संगठनों के तेज़ी से सक्रिय होने के कारण राज्य में छात्र राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।



















