ऊना (विशाल): जिला ऊना के पीरनिगाह के समीप हुए भीषण ट्रक हादसे ने क्षेत्रीय अस्पताल ऊना की आपातकालीन व्यवस्थाओं को चुनौती दे दी। हादसे के बाद एक साथ 52 घायलों के अस्पताल पहुंचने से अफरा-तफरी का माहौल बन गया और अस्पताल में बिस्तरों की कमी पड़ गई। हालांकि, अस्पताल प्रशासन की मुस्तैदी के चलते किसी भी घायल के इलाज में देरी नहीं हुई। मरीजों को स्ट्रेचर और यहां तक कि स्टाफ रूम में भी बेड लगाकर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
चिकित्सा अधीक्षक ने खुद संभाली कमान
हादसे की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय अस्पताल का पूरा स्टाफ हाई अलर्ट पर आ गया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया ने खुद फ्रंटलाइन पर आकर कमान संभाली और पूरी प्रक्रिया के दौरान आपातकालीन वार्ड में डटे रहे। हड्डी रोग विशेषज्ञों सहित चिकित्सकों की एक बड़ी टीम लगातार घायलों के उपचार में जुटी रही। गंभीर घायलों को तुरंत माइनर ऑप्रेशन थिएटर में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने भी घायलों को एक्स-रे रूम और वार्डों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
पुलिस ने शुरू की हादसे के कारणों की जांच
हादसे की गंभीरता को देखते हुए सदर पुलिस थाना की टीम भी तुरंत अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंच गई। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज करने शुरू कर दिए हैं। पुलिस अधीक्षक सचिन हीरेमठ ने बताया कि हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस टीम गहनता से जांच कर रही है। घटनास्थल का मुआयना कर लिया गया है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी कलमबद्ध किए जा रहे हैं।
क्या कहते हैं चिकित्सा अधीक्षक?
वहीं, क्षेत्रीय अस्पताल के एमएस डॉ. संजय मनकोटिया ने बताया कि घायलों को समयबद्ध और उचित उपचार मिले, इसके लिए पूरे स्टाफ को पहले ही अलर्ट कर दिया गया था। भीड़ और अफरा-तफरी को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा दस्ता भी तैनात रहा। हमारी प्राथमिकता हर एक मरीज की जान बचाना और उसे तुरंत राहत देना थी।



















