दुनिया भर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों पर जानलेवा हमलों और हत्याओं के हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं, चाहे वह अमरीका हो, मिस्र या कोई अन्य देश। इसी महीने मैक्सिको के मशहूर टिकटॉक इंफ्लुएंसर ‘सीरज गैस्टेलम’ की उस समय गोली मार कर हत्या कर दी गई जब वह सड़क पर लाइवस्ट्रीम कर रहे थे। अगस्त में ही 13 लाख से अधिक फालोअर्स वाली पाकिस्तान की मशहूर टिकटॉकर ‘आयशा गिलामाना’ को अगस्त 2026 में उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार 2 हमलावरों ने गर्दन में गोली मार कर मार डाला।
भारत भी ऐसी ङ्क्षहसक घटनाओं से अछूता नहीं रहा। इसी महीने पुणे में सोशल मीडिया क्रिएटर ‘माधवी कुंभार’ और ‘अथर्व जगताप’ के बीच इंस्टाग्राम पर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि ‘अथव’ पर एक कैफे में धारदार हथियार से हमला कर दिया गया। पुलिस ने इस मामले में माधवी सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है। और अब 26 अगस्त, 2026 को लगभग 2 माह पूर्व चंडीगढ़ से अपहरण की गई सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर मंजीत कौर, जिसे उसके 2 परिचितों ने 3 जुलाई रात को जबरन कार में बिठा कर मोरिंडा ले जाकर उसके साथ मारपीट करने के बाद एक शहतूत के पेड़ से बांधकर आग लगा दी थी, की गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण कई सप्ताह तक बेहोश रहने के बाद पी.जी.आई. एम.ई.आर. में मौत हो गई।
सोशल मीडिया पर सक्रिय कुछ युवा ‘इन्फ्लुएंसर’ राजनीति और देश को दरपेश अन्य समस्याओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी खोज कर सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं लेकिन अब ऐसे तत्वों का निशाना बन रहे हैं जिनके हितों पर उनके द्वारा किए जाने वाले रहस्योद्घाटनों से आंच आती है। यदि इन लोगों की इस तरह जुबानबंदी की जाएगी तो लोगों की नजरों से छिपी हुई वह जानकारी कैसे सामने आ पाएगी, जिसका लोगों को पता लगना देश के हित में जरूरी है! निश्चित रूप से यह अपनी आलोचना के प्रति असहनशीलता और उसको सह न पाने की प्रभावशाली लोगों के बीच बढ़ रही मानसिकता का ही प्रमाण है।
इस सम्बन्ध में कबीर का एक दोहा उल्लेखनीय है जिसमें वह कहते हैं :
सहज मिले सो दूध है, मांगा मिलै सो पानी,
कहै कबीर वह रक्त है, जामें ऐंचा तानी।
यानी कि जो वस्तु या सफलता अपने प्रयास, मेहनत से सहज रूप से प्राप्त हो जाए वह दूध के समान उत्तम और पौष्टिïक होती है, जो चीज मांग-मांग कर हासिल की जाए वह पानी के समान होती है और तीसरी है वह चीज जो बहुत खींचतान, लड़ाई-झगड़े या जबरन दबाव डाल कर प्राप्त की जाती है, वह खून चूसने या कष्टï देने वाली होती है। ऐसी सफलता कभी रास नहीं आती।
कबीर ने यह दोहा पांच सौ वर्ष पूर्व लिखा था कि ईष्र्या और असहनशीलता के वशीभूत होकर गलत काम करने की बजाय यदि तुम मेहनती हो तो तुम्हें ङ्क्षहसक होने की आवश्यकता नहीं लेकिन अब भी हमारे समाज में यही माहौल है कि लोग आलोचना नहीं सहन कर पाते।
लोग किसी व्यक्ति द्वारा अपनी गलती के विषय में बताने पर शांतिपूर्वक किसी भी बात को सुनना पसंद नहीं करते। और अब चूंकि वर्तमान पीढ़ी को सोशल मीडिया पर कुछ भी बोलने की आजादी है, तो उसे पसंद न करने के कारण जल्द ही सारी दुनिया में कई सरकारें सोशल मीडिया की इस आजादी पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही हैं। यूं तो जब तक किसी व्यक्ति के पास कोई प्रमाण नहीं है तब तक किसी विषय पर कुछ नहीं कहना चाहिए।
इन्फ्लुएंसर, जिनमें अधिकांश लड़कियां एवं युवा लड़के हैं, अपने पहनावे, फिल्मों और पाॢटयों के बारे में तथा राजनीति के अलावा अन्य विषयों पर अपने हिसाब से बहस करते हैं। परंतु किसी बात पर असहमति के कारण किसी को जला कर मार डालना तो अमानवीय तथा गंभीर अपराध है और ऐसा करने वालों को भी उतना ही कठोर दंड देना अनिवार्य है ताकि भविष्य में इस तरह के गलत रुझान पर रोक लग सके।
हमारा संविधान भी यह बात कहता है कि लड़कियां भी वह सब कुछ कर सकती हैं जो लड़के कर सकते हैं परंतु महिलाओं के प्रति असमान भाव रखना और उनके बारे में यह कहना कि कोई लड़की इतना खुल कर सामने क्यों आ रही है, इन कुछ बातों के मामले में समाज को अपने नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत है। यह भी जरूरी है कि पुलिस और न्यायपालिका प्रभावी तथा कुशल भूमिका निभाएं क्योंकि यह हिंसा तेजी से गैंग हिंसा का रूप ले रही है।



















