Hanuman Ansh : हालांकि छोटे बजट की फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर सफल होना नई बात नहीं है लेकिन हनुमान अंश की कामयाबी वाकई मिसाल बन गई है। महान संत नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक सफर पर बनी इस फिल्म ने कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस शानदार सफलता का श्रेय केवल फिल्म की कहानी को नहीं दिया जा रहा बल्कि इसके निर्माण के दौरान अपने गए आध्यात्मिक नियमों और खास दिशा-निर्देशों को भी माना जा रहा है।
बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्मों को छोड़ा पीछे
हनुमान अंश फिल्म को सिर्फ 1.8 से 2 करोड़ रुपए के बेहद कम बजट में तैयार किया गया था। हालांकि, लागत सीमित होने के बावजूद इसने बॉक्स ऑफिस पर अपनी कुल लागत से 500 प्रतिशत से भी अधिक का शानदार मुनाफा बटोरा है। शुरुआत ने भले ही इसकी कमाई की रफ्तार थोड़ी धीमी रही हो लेकिन दर्शकों की तारीफ और जुबानी प्रचार के बल पर इसने बॉलीवुड की कई बड़ी-बड़ी फिल्मों को पछाड़ दिया है।
भंडारे द्वारा किया प्रमोशन
कम बजट के कारन निर्माताओं के पास फिल्म के बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे में पारंपरिक विज्ञापनों का रास्ता चुनने के बजाय उन्होंने 8 स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया। यह अनोखा विचार फिल्म के लिए एक जबरदस्त पब्लिसिटी जरिया साबित हुआ और लोग भावनात्मक रूप से इससे जुड़ते चले गए। इसके साथ ही, सेंसर बोर्ड ने भी बिना किसी बदलाव या कट के फिल्म को ‘U’ (यूनिवर्सल) सर्टिफिकेट देकर हरी झंडी दिखाई।
फिल्म के लिए प्रेमानंद महाराज जी का लिया मार्गदर्शन
फिल्म के निर्देशक और लेखक विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, शूटिंग समाप्त होने के बाद निर्माताओं ने विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज से मार्गदर्शन प्राप्त किया था। महाराज जी ने फिल्म के मुख्य कलाकारों को हमेशा शाकाहारी रहने की सलाह दी। मेकर्स ने इस सुझाव को पूरी श्रद्धा के साथ स्वीकार किया और पूरी टीम ने इसका सख्ती से पालन।
बनाए गए थे सख्त नियम
शूटिंग के दौरान सेट पर किसी भी तरह के अभद्र व्यव्हार की सख्त मनाही थी। काम शुरू करने से पहले और खत्म होने के बाद पूरी टीम का ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करना अनिवार्य कर दिया गया था। इसके अलावा, गाली-गलौज, आपसी झगड़े, मांसाहार और शराब के सेवन पर पूरी तरह पाबंदी थी। अगर शूटिंग के बीच कोई बाधा आती तो सभी सदस्य मिलकर पाठ करते थे और समस्या हल हो जाती थी।



















