नई दिल्ली. कभी पर्दे पर दिखाई गई आस्था लोगों को भीतर तक छू जाती है, तो कभी असल जिंदगी में घटा कोई वाकया लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है. इन दिनों ऐसा ही कुछ देखने को मिल रहा है. एक तरफ ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म अपनी कहानी और आध्यात्मिक भावनाओं से दर्शकों का ध्यान खींच रही है, तो दूसरी तरफ उज्जैन से सामने आई एक घटना ने लोगों के बीच चमत्कार की चर्चा छेड़ दी है. मंदिर का ढांचा हट गया, भारी मशीनों से कोशिश हुई, लेकिन जिस प्रतिमा को अपनी जगह से हटाने की कोशिश की जा रही थी, वह टस से मस नहीं हुई. अब भक्त इसे बजरंगबली की मौजूदगी और इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं.
सिनेमाघरों में ‘हनुमान अंश’ की ब्लॉकबस्टर सुनामी
बहुत ही सीमित बजट में बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए 140 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्डतोड़ कमाई कर ली है. फिल्म में दिखाई गई आस्था, चमत्कार और भक्ति का असर ऐसा है कि सिनेमाघर किसी पावन धाम में तब्दील हो चुके हैं. हर शो के अंत में दर्शक भावुक होकर ‘जय श्री राम’ और ‘जय बजरंगबली’ के जयकारे लगा रहे हैं.
नीम करोली बाबा का चमत्कार
फिल्म की चर्चा सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रही. इसके पीछे की कहानी और आध्यात्मिक भाव ने भी दर्शकों के बीच अलग तरह का कनेक्शन बनाया. शूटिंग से जुड़े कलाकारों ने भी अपने एक्सपीरियंस शेयर किए हैं. फिल्म के निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने इसके लिए काफी तैयारी की थी. शूटिंग के दौरान धार्मिक अनुशासन का पालन, हनुमान चालीसा का पाठ, रुकावटों के बाद हुए करिश्मे ये सब कहानियां अब लोगों तक पहुंच रही हैं. लेकिन, पर्दे पर दिखाया गया यह भक्ति रस अब सिर्फ रील लाइफ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर रियल लाइफ में भी देखने को मिल रहा है.
नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक मंदिर के पंडित के आग्रह पर इंदौर आईआईटी टीम को बुलाया गया. टीम ने मंगलवार को करीब दो घंटे तक जांच की. विशेष उपकरणों से प्रतिमा की जमीन में गहराई और आसपास की संरचना की जानकारी जुटाई. अब रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय होगी.
‘हनुमान अंश’ की धूम के की इसी बीच मध्य प्रदेश के उज्जैन से आई तस्वीरों और खबरों ने लोगों का ध्यान खींच लिया. दरअसल, शहर में सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर को हटाने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई. इसे चमत्कार कहिए या कुछ और… मंदिर का ढांचा हटाया जा चुका है, लेकिन करीब आठ फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा को अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई. उज्जैन नगर निगम ने भारी मशीनों का इस्तेमाल किया. लेकिन प्रतिमा जस की तस है.
170 साल पुराना है मंदिर, आस्था अपार
बताया जा रहा है कि यह मंदिर करीब 170 साल पुराना माना जाता है. अब अधिकारी प्रतिमा की स्कैनिंग और उसके आधार की स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे हैं. जब प्रशासन की टीमें मूर्ति हटाने की कोशिश कर रही थीं, उसी दौरान अचानक दर्जनों बंदर मंदिर के आस-पास जमा हो गए और वहां बैठ गए. ये देख लोगों की आस्था और जाग गई. कई श्रद्धालुओं की आंखों में तो आंसू तक आ गए. अब एक तरफ जहां साइंस और तकनीक इस बात को पत्थर की गहरी नींव से जोड़कर देख रही है. वहीं उज्जैन की जनता और ‘हनुमान अंश’ के दर्शकों का मानना है कि भगवान की मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता.



















