मुंबई: गणेशोत्सव के दौरान तेज आवाज में डीजे, लाउडस्पीकर और ढोल-ताशों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि अदालत के 2016 के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राज्य में ध्वनि प्रदूषण रोकने के नियमों का प्रभावी रूप से पालन नहीं हो रहा है।
कब होगी सुनवाई?
चीफ जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस सेठना की बेंच के सामने आगामी 5 अक्टूबर 2026 को याचिका पर सुनवाई हो सकती है। हालांकि सीनियर ऐडवोकेट अनिल साखरे ने कोर्ट से याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि कि पुणे में गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण को लेकर विवाद की स्थिति बनी है। एक व्यक्ति पर तेज आवाज वाले डीजे का विरोध करने के कारण हमला भी हुआ है।
याचिका में क्या?
याचिका में महेश विजय बेडेकर बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में 2016 में दिए गए हाई कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है। उस फैसले में अदालत ने ध्वनि प्रदूषण नियमों के कड़ाई से पालन के लिए कई निर्देश जारी किए थे। अदालत ने स्पष्ट किया था कि धार्मिक स्थलों पर भी लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल के लिए आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। इस मुद्दे पर अक्षय बिक्कड़ ने इस मुद्दे पर याचिका दायर की है।
लाउडस्पीकर पर रोक का नहीं हो रहा पालन
याचिका में कहा गया है कि अदालत के निर्देशों में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक, शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई तथा शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की व्यवस्था समेत कई उपाय शामिल थे। मगर जमीनी स्तर पर नियमों का पालन होता नहीं दिखाई देता है। प्रमुख त्योहारों से पहले आयोजकों को ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों की जानकारी देने के लिए बैठकें आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया था।
साइलेंस जोन में ध्वनि स्तर की प्रभावी निगरानी अब भी एक चुनौती
याचिका के मुताबिक, आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और साइलेंस जोन में ध्वनि स्तर की प्रभावी निगरानी अब भी एक चुनौती है। याचिकाकर्ता ने गणेशोत्सव के साथ आगामी नवरात्रि जैसे त्योहारों को देखते हुए अदालत से 2016 के निर्देशों का प्रभावी ढंग पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।



















