संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देशों की बैठकें आरंभ हो रही हैं। युद्ध, शांति, स्थिरता महासभा के बुनियादी एजेंडे में शामिल हैं। हालांकि युद्ध तभी शांत और समाप्त हो सकते हैं, जब युद्धरत देशों में संवाद और समझौता हो सके। फिलहाल ऐसे आसार न तो रूस-यूक्रेन युद्ध और न ही ईरान युद्ध में दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की महत्ता, उसके आह्वान, उसकी मध्यस्थता और सामूहिक प्रासंगिकता खंडित, क्षीण हो चुके हैं, लिहाजा युद्ध भडक़ रहे हैं। आम आदमी मर रहा है या विस्थापन को विवश है अथवा भुखमरी-शरण का शिकार है। महासभा के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति टं्रप और यूक्रेन के आपातकालीन राष्ट्रपति जेलेंस्की के अतिरिक्त राष्ट्रपति टं्रप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकातें और संवाद ‘व्हाइट हाउस’ में होने हैं। जेलेंस्की को युद्ध रोकने को टं्रप बाध्य कर पाएंगे, इसके प्रथमद्रष्ट्या आसार नहीं हैं। टं्रप ने जेलेंस्की को फोन पर भी अपील की थी कि रूस के तेल ठिकानों, ऊर्जा-संयंत्रों, रिफाइनरियों पर हमले न किए जाएं। उससे वैश्विक संकट गहराता जाएगा। जेलेंस्की नहीं माने और एक साथ 1600 से अधिक ड्रोन दाग कर मॉस्को और आसपास के ऊर्जा-ठिकानों पर ही हमले कराए। यूक्रेन का रूस पर यह सबसे बड़ा और विनाशक हमला था। हालांकि रूस का दावा है कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने 1110 ड्रोन हवा में ही मार गिराए, लेकिन 450 से अधिक ड्रोनों के हमले विध्वंसकारी, भस्मकारी, विनाशक साबित हुए। रूस का करीब 40 फीसदी रिफाइनिंग सिस्टम नष्ट हो चुका है।
भारत से पेट्रोल, डीजल खरीदने पड़ रहे हैं, जबकि भारत को सबसे अधिक कच्चा तेल रूस ही सप्लाई कर रहा है। अमरीकी पाबंदियों की परवाह नहीं है। राष्ट्रपति टं्रप का बयान आया है कि अब यह ‘बेतुका युद्ध’ रुकना चाहिए, क्योंकि हर महीने 25,000 से ज्यादा लोग और सैनिक मर रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध ‘बेतुका’ है, तो ईरान में कौन-सा युद्ध जारी है? उस युद्ध को किसने जबरन थोपा था? राष्ट्रपति टं्रप शेष विश्व को ‘मूर्ख’ और ‘अज्ञानी’ न समझें। खौफनाक आंकड़े ये हैं कि साढ़े 4 साल से जारी युद्ध में रूस के करीब 3-4.5 लाख सैनिक हताहत हो चुके हैं। कुछ रपटों में हताहत और घायल सैनिकों की संख्या 10 लाख से अधिक बताई गई है। यह ‘मानवीय संहार’ की स्थिति है। स्वतंत्र और पश्चिमी संस्थाओं के अनुमान के मुताबिक, यूक्रेन के 1-1.5 लाख सैनिक मारे जा चुके हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की अक्सर ये आंकड़े करीब 46,000 से 55,000 के बीच मानते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च आयुक्त कार्यालय के मुताबिक, फरवरी, 2022 से जुलाई, 2026 तक यूक्रेन में कमोबेश 16,874 आम नागरिक मारे गए और 51,000 से ज्यादा घायल हुए हैं। दरअसल रूस और यूक्रेन ने आधिकारिक रूप से हताहत सैनिकों और नागरिकों तथा विस्थापित लोगों के डाटा कभी नहीं दिए हैं, लिहाजा विभिन्न संस्थाओं के अनुमान ही मान्य हैं। सबसे खौफनाक, विनाशक, तबाही-बर्बादी के नतीजतन आने वाली सर्दियों में यूरोप और यूक्रेन किस कदर कांपते-ठिठुरते रहेंगे, इसका मानवीय अंदाजा ही लगाया जा सकता है, क्योंकि एक तरफ रूस और दूसरी तरफ सऊदी अरब की पाइपलाइन फिलहाल खंडित अवस्था में हैं और गैस आपूर्ति करने में असहाय, असमर्थ हैं। यूक्रेन की राजधानी कीव और प्रमुख शहरों, स्टील और ऊर्जा के संयंत्रों में 70-90 फीसदी तक की तबाही बताई जा रही है। रूस के अत्यंत विनाशकारी, विध्वंसकारी हमले जारी हैं। दोनों देशों ने मिसाइल-ड्रोन हमले कर सैन्य गोदाम, कैंप, सप्लाई के भंडार, हथियार डिपो, लॉजिस्टिक सेंटर, मॉल और तेल-गैस ठिकानों पर ऐसे हमले किए हैं कि वजूद ही खत्म कर रहे हैं। न जाने इन देशों के पुनर्निर्माण कैसे संभव होंगे? राष्ट्रपति जेलेंस्की किसी खंडहर देश के नेता साबित होना चाहते हैं क्या? रूस सबसे विशालकाय देश है। वहां स्टेट ड्यूमा (लोकसभा के समान) के चुनावों में राष्ट्रपति पुतिन की पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया’ को करीब 58 फीसदी वोट मिले हैं और उन्होंने 355 सीटें जीत कर फिर बहुमत हासिल किया है। बहरहाल लगभग सभी यूरोपीय देशों में तेल-गैस के संकट गहराते जा रहे हैं। तेल खत्म होने के कगार पर है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र, 193 देशों, खासकर राष्ट्रपति टं्रप और द्विपक्षीय संवाद करने वाले राष्ट्रपतियों से ही आखिरी उम्मीद और अपेक्षा है कि वे युद्ध रुकवाने में अपनी पूरी शक्ति, तमाम प्रभावों को झोंक दें।



















