नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी को लेकर उठे मुद्दों को लेकर ये याचिका दायर की गई है।
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह याचिका अंग्रेजी अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद दायर की गई है जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट को आधार बताते हुए बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को गैर-कानूनी घोषित करने की मांग की गई है।
SIT जांच की मांग
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की मांग है कि इस बात की SIT से जांच कराई जाए कि वोटर लिस्ट से 13 करोड़ वोटरों के नाम कैसे हटाए गए।
रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों पर सवाल खड़े किए गए। इन फैसलों में से ‘फॉर्म 6’ में बदलाव और चुनावी रोल डेटा का प्रबंधन शामिल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आपत्तियां उन फैसलों से जुड़ी थीं जो उनकी जानकारी के बिना या उनकी सिफारिशों के खिलाफ लिए गए थे।
याचिका में इस रिपोर्ट के आधार पर RP एक्ट के तहत ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से सक्षम अधिकारी को निर्देश देने की मांग की है कि वे ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950’ की धारा 32 के तहत शिकायतें दर्ज करें और मुकदमा शुरू करें।
याचिका में ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।
याचिका के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मई 2026 में फॉर्म 6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी। जोशी ने कहा था कि ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ में संबंधित संशोधन किए बिना कानूनी फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता। बाद में संधू ने भी इस बात का समर्थन किया।



















